करिश्मा कपूर के बच्चों की याचिका पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रिया कपूर को फटकारा
क्या है खबर?
अभिनेत्री करिश्मा कपूर और उनके बच्चों को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने संजय कपूर की वसीयत की फॉरेंसिक जांच के आदेश दिए हैं। करिश्मा के बच्चों, समायरा और कियान ने अपने पिता की वसीयत की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए इसे चुनौती दी थी। इस अदालती आदेश को कपूर परिवार के लिए महत्वपूर्ण जीत माना जा रहा है, क्योंकि अब वैज्ञानिक जांच से साफ हो सकेगा कि वसीयत असली है या नहीं।
मंजूरी
मानी गई भाई-बहन की मांग
दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायिक गगनदीप जिंदल ने विवादित वसीयत की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच को हरी झंडी दे दी है। कोर्ट का ये फैसला समायरा और कियान कपूर के उस निरंतर संघर्ष की जीत है, जो वे नवंबर 2025 से लड़ रहे थे। भाई-बहन की मांग थी कि इस दस्तावेज की विशेषज्ञ जांच होनी चाहिए, ताकि ये साफ हो सके कि वसीयत कब और कैसे बनाई गई और क्या यह वास्तव में उनके पिता की अंतिम इच्छाओं को दर्शाती है।
झटका
प्रिया कपूर को बड़ा झटका
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि प्रिया कपूर और उनके बेटे निर्धारित समय के भीतर जवाब दाखिल करने में विफल रहे हैं। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे वे जानबूझकर इस अंतरिम आवेदन के फैसले में देरी करने की कोशिश कर रहे हैं। ये आदेश प्रिया के लिए बड़ी हार माना जा रहा है, क्योंकि वो और उनका बेटा ही संजय कपूर की वसीयत की फॉरेंसिक जांच का विरोध कर रहे थे।
दावा
क्या प्रिया कपूर हैं संजय के पूरे साम्राज्य की इकलौती वारिस?
कोर्ट ने गौर किया कि इस जांच का विरोध करने वाले प्रिया और उनके बेटे अकेले थे। वसीयत की निष्पादक श्रद्धा सूरी मारवाह और संजय कपूर की मां रानी कपूर ने भी इस फॉरेंसिक जांच पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उधर प्रिया का कहना है कि संजय की वसीयत उनकी मौजूदगी में तैयार और साइन हुई थी। प्रिया का साफ कहना है कि संजय कपूर के पूरे बिजनेस साम्राज्य की इकलौती उत्तराधिकारी वही हैं।
खारिज
वसीयत विवाद में अदालत ने प्रिया के तर्क ठुकराए
वसीयत की मुख्य लाभार्थी होने के बावजूद प्रिया ने इसकी फॉरेंसिक जांच का कड़ा विरोध किया। उनके वकील ने तर्क दिया कि वसीयत एक 'गोपनीय दस्तावेज' है और रजिस्ट्रार के पास इसकी वैज्ञानिक जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है। अदालत ने प्रिया के तर्क खारिज कर दिए। समायरा कपूर के वकील ने कहा कि रजिस्ट्रार फॉरेंसिक जांच की पूरी अनुमति दे सकते हैं और 'गोपनीयता' के नाम पर वसीयत की समीक्षा नहीं रोकी जा सकती।
सुनवाई
कब होगी अगली सुनवाई?
बता दें कि हाई-प्रोफाइल वसीयत विवादों में लिखावट, स्याही और कागज की फॉरेंसिक जांच एक मानक प्रक्रिया है। अब संजय कपूर की वसीयत की भी इसी तरह वैज्ञानिक बारीकी से जांच होगी। कोर्ट ने अब 10 मार्च की तारीख तय की है। इस दिन कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) को सुरक्षित रखने और संजय व प्रिया के मोबाइल फोन पेश करने को लेकर सुनवाई होगी। समायरा-कियान के लिए यह आदेश बड़ी जीत, जबकि प्रिया के लिए चुनौती बन गई है।