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#NewsBytesExplainer: सरकार ने क्यों बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम? क्या और बढ़ोतरी होगी? 
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है

#NewsBytesExplainer: सरकार ने क्यों बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम? क्या और बढ़ोतरी होगी? 

लेखन आबिद खान
May 15, 2026
11:57 am

क्या है खबर?

ईरान युद्ध से उपजे आर्थिक हालात के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नए दाम आज यानी 15 मई से ही लागू हो गए हैं। करीब 2 साल बाद ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घर से काम और ईंधन बचाने की अपील के बाद ये तय था कि ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। आइए इसके पीछे की वजह समझते हैं।

कच्चा तेल

लगातार बढ़ रही है कच्चे तेल की कीमतें

ईरान युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। इससे कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ी हैं। युद्ध शुरू होने से पहले भारत में कच्चे तेल की कीमत लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल थी। युद्ध के बाद यह बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हो गई। इससे घरेलू बाजार में भी तेल की कीमतें बढ़ना तय था।

रुपये

रुपये में गिरावट भी वजह

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में होता है। हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। रुपये में गिरावट से भारत को तेल के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है। इसलिए, भले ही कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहें, लेकिन अगर रुपया कमजोर होता रहा तो लागत बढ़ जाती है। तेल की कीमत के साथ डॉलर महंगा होने से ये दोहरा दबाव है।

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नुकसान

तेल कंपनियों को हो रहा था भारी नुकसान

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से ईंधन कंपनियों को भारी घाटा हो रहा था। करीब 10 हफ्ते तक ये कंपनियां घाटा उठाकर पेट्रोल और डीजल पुराने दामों पर बेचती रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों को हर दिन 1,600 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था। 10 हफ्तों में घाटा 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया था। इसलिए कंपनियों की कुछ भरपाई करने के लिए कीमतें बढ़ाना जरूरी था।

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सरकार

सरकार को भी हो रहा नुकसान

सरकार ने पहले ही दबाव कम करने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती की थी। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये से घटकर 3 रुपये, जबकि डीजल पर 10 रुपये से घटकर शून्य किया गया था। इससे सरकार को राजस्व में हर महीने 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। यानी एक तरफ सरकारी राजस्व में गिरावट आ रही थी, तो दूसरी तरफ तेल कंपनियों का घाटा भी बढ़ रहा था।

अन्य वजहें

ये वजहें भी हैं जिम्मेदार?

होर्मुज में तनाव के चलते शिपिंग जोखिम बढ़ गया है। इससे जहाज और माल के बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही जहाज सुरक्षित सफर के लिए लंबे रास्ते से होकर आ रहे हैं। इससे भी लागत बढ़ी है। भारत वैकल्पिक उपाय के तौर पर दूर के देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है। करीबी देशों की तुलना में यहां से तेल की खरीदी महंगी है। अलग-अलग ईंधन को परिष्कृत करने में रिफाइनरियों का खर्च भी बढ़ा है।

और बढ़ोतरी

क्या और बढ़ सकती हैं कीमतें?

जानकारों का मानना है कि सरकार एकदम से कीमतें बढ़ाने की बजाय धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाने की रणनीति अपना रही है। चूंकि तेल कंपनियों को अभी भी घाटा हो रहा है और ईरान युद्ध में समझौते के आसार नजर नहीं आ रहे हैं, इसलिए कीमतें और बढ़ने की आशंका है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का आकलन है कि मौजूदा कच्चे तेल की कीमतों के हिसाब से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

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