संजय कपूर संपत्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाना है
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की पत्नी प्रिया सचदेव और उनकी सास रानी कपूर के बीच चल रहे संपत्ति विवाद को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रिया सचदेव को मानवीय आधार पर इस कानूनी जंग को खत्म करने और आपसी सहमति से मामला सुलझाने की सलाह दी है। जज ने कहा कि 80 वर्षीय रानी कपूर की उम्र को देखते हुए परिवार को विवाद लंबा खींचने के बजाय सम्मानजनक समझौता करना चाहिए।
सलाह
लंबी लड़ाई किसी के हित में नहीं, सुलह करें- कोर्ट
रानी कपूर और उनकी बहू प्रिया सचदेव के बीच चल रहे 30 हजार करोड़ के संपत्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को शांति से सुलह करने की नसीहत दी है। जज जेबी पारदीवाला और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने मामले की सुनवाई कर परिवार को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय पहलू और रानी कपूर की उम्र का हवाला देते हुए कहा कि ये कानूनी लड़ाई किसी के हित में नहीं है।
नसीहत
कोर्ट ने कहा- झगड़ा खत्म करें, वरना बहुत लंबी होगी ये जंग
सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा, "हमने पहले ही मध्यस्थ से प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है। फिलहाल हमारा दोनों पक्षों से अनुरोध है कि वे ऐसा कोई भी कदम न उठाएं, जिससे मध्यस्थता की कार्रवाई पर सीधा असर पड़े। हमने बार-बार कहा है कि इस विवाद को यहीं खत्म करना सभी पक्षों के हित में होगा, वरना ये एक बहुत लंबी और थका देने वाली कानूनी लड़ाई बन जाएगी।"
ूमकम
कोर्ट ने परिवार को सिखाया जीवन का पाठ
सुनवाई के दौरान बेंच ने बेहद मार्मिक टिप्पणी करते हुए कहा, "रानी कपूर 80 साल की बुजुर्ग महिला हैं। हम सब खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है। हम अपने साथ सिर्फ अपनी आत्मा लेकर जाते हैं। मामले को सुलझाने के लिए इच्छाशक्ति होनी चाहिए। मध्यस्थ के पास सिर्फ इसलिए न जाएं, क्योंकि कोर्ट ने दबाव बनाया है, बल्कि इसलिए जाएं क्योंकि आप खुद इसे खत्म करना चाहते हैं। आप में से हर कोई कोशिश करे।"
दो टूक
"सुलह करें या सुनवाई के लिए तैयार रहें"
कोर्ट ने रानी कपूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कंपनी में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति पर रोक लगा दी है और बहू पर 'जबरन कब्जे' के आरोपों के बीच परिवार को आपसी सुलह की नसीहत दी है। बेंच ने प्रिया से कहा कि 80 वर्षीय बुजुर्ग सास की उम्र का लिहाज कर इस लंबी कानूनी जंग को मध्यस्थता के जरिए खत्म करें और अगर सुलह में दिलचस्पी नहीं है तो फिर कोर्ट समय बर्बाद किए बिना सीधे सुनवाई करेगा।