भारत में PCB की कमी बढ़ने का खतरा, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पर पड़ सकता है असर
क्या है खबर?
भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के सामने आने वाले समय में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) की कमी बड़ी चुनौती बन सकती है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, यह समस्या कम से कम 2027 के मध्य तक बनी रह सकती है। इससे स्मार्टफोन, टीवी, दूरसंचार उपकरण और कारों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है। कंपनियों को जरूरी सामान मिलने में देरी हो सकती है, जिससे उत्पादन और आपूर्ति दोनों पर असर पड़ सकता है।
दबाव
AI सर्वर की मांग से बढ़ रहा दबाव
PCB की कमी के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े उपकरणों की बढ़ती मांग भी एक बड़ी वजह है।
AI डाटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले खास तरह के PCB की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा, नई दूरसंचार तकनीक के लिए भी इनकी मांग बढ़ी है।
सिरमा SGS टेक्नोलॉजी के प्रबंध निदेशक जेएस गुजराल के मुताबिक, आने वाली तिमाहियों में कमी और बढ़ सकती है। सप्लाई में सुधार अगले साल के मध्य तक होने की उम्मीद है।
कीमत
कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी
PCB बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में भी तेजी आई है।
इंडिया प्रिंटेड सर्किट एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में कॉपर-क्लैड लैमिनेट की कीमत 300 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी है। कुछ खास रेजिन और दूसरे रासायनिक पदार्थों की कमी ने भी परेशानी बढ़ाई है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण पेट्रोकेमिकल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे PCB बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ रही है और उत्पादन पर दबाव पड़ रहा है।
अन्य
कंपनियों ने सरकार से मांगी राहत
इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने सरकार से PCB बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और कॉपर-क्लैड लैमिनेट पर आयात शुल्क में छूट देने की मांग की है।
साथ ही, एंटी-डंपिंग शुल्क हटाने जैसे उपायों की भी अपील की गई है। हालांकि, अभी तक कंपनियों को कोई राहत नहीं मिली है।
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केवल शुल्क हटाने से समस्या हल नहीं होगी, क्योंकि बाजार में पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध होना भी जरूरी है।