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अमेरिका ने 2,380 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज चुकाए बिना विश्व स्वास्थ्य संगठन छोड़ा
अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर WHO छोड़ दिया है

अमेरिका ने 2,380 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज चुकाए बिना विश्व स्वास्थ्य संगठन छोड़ा

लेखन आबिद खान
Jan 23, 2026
11:35 am

क्या है खबर?

अमेरिका आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर हो गया है। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) ने कहा कि WHO को दी जाने वाली सभी धनराशि बंद कर दी गई है और अमेरिकी कर्मचारियों को इसके मुख्यालय और दुनिया भर के कार्यालयों से वापस बुला लिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन WHO से बाहर निकलने वाले कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे।

कर्ज

2,380 करोड़ का कर्ज भी नहीं चुकाएगा अमेरिका

ब्लूमबर्ग और रॉयटर्स के अनुसार,अमेरिका पर WHO का 2, 380 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज भी बकाया है। अमेरिका ने इसे चुकाने से मना कर दिया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कहा कि वे कोई भुगतान नहीं करेंगे, क्योंकि WHO को पहले ही जरूरत से ज्यादा दे चुके हैं। HHS के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि WHO छोड़ने से पहले अमेरिका के लिए कर्ज का भुगतान करना कोई वैधानिक जरूरत नहीं है।

दानदाता

WHO का सबसे बड़ा दानदाता था अमेरिका

अमेरिका WHO का सबसे बड़ा दानदाता था। ब्लूमबर्ग के अनुसार, 2022 और 2023 के बीच अमेरिका ने इस संगठन को लगभग 1,200 करोड़ रुपये दिए थे। दरअसल, WHO को 2 तरीकों से राशि मिलती है। पहला- सदस्य देशों से अनिवार्य योगदान और दूसरा- देशों और संगठनों से मिला दान। अनिवार्य योगदान का करीब 22 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका से आता था। वहीं, 2023 में WHO को मिले स्वैच्छिक योगदान का 13 प्रतिशत अमेरिका ने दिया था।

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वजह

अमेरिका ने क्यों छोड़ा WHO?

जनवरी, 2025 में ट्रंप ने WHO छोड़ने के कार्यकारी आदेश में तर्क दिया था कि WHO अनुचित रूप से भारी फंडिंग की मांग कर रहा है, जो दूसरे देशों की तय राशि के मुकाबले बहुत ज्यादा है। इसके अलावा कोविड-19 महामारी को ठीक से न संभालना और आवश्यक सुधारों को अपनाने में विफलता जैसी वजहें भी बताई गई थीं। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "WHO बीमारियों को रोकने, संभालने और जानकारी साझा करने में नाकाम रहा है।"

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असर

अमेरिका के इस कदम का क्या होगा असर?

इस फैसले से दुनियाभर के स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर असर पड़ेगा। WHO कई देशों में टीकाकरण से लेकर टीबी उन्मूलन समेत कई कार्यक्रम चलाता है। अमेरिकी फंडिंग बंद होने से WHO को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने अपनी प्रंबधन टीम में आधे कर्मचारियों की छंटनी की है और कई कार्यक्रम बंद कर दिए हैं। WHO का कहना है कि इस साल उसे अपने करीब एक चौथाई कर्मचारियों की संख्या कम करनी पड़ सकती है।

प्लस

न्यूजबाइट्स प्लस

WHO सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार अंतरराष्ट्रीय निकाय है, जो संयुक्त राष्ट्र (UN) का हिस्सा है। इसकी स्थापना 1948 में हुई थी। यह स्वास्थ्य नीति और नियोजन से जुड़े कई पहलुओं पर काम करता है। जब कोई बड़ी बीमारी फैलती है तो WHO अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया का समन्वय करने, अंतरराष्ट्रीय मानक निर्धारित करने, उनका वर्गीकरण करने और सभी ज्ञात लक्षणों को सूचीबद्ध करने का काम करता है। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा में है।

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