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डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को अवैध बताया
टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया

डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को अवैध बताया

लेखन आबिद खान
संपादन Manoj Panchal
Feb 20, 2026
08:55 pm

क्या है खबर?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाते हुए इन्हें असंवैधानिक करार दिया। 6-3 के मत से निर्णय देते हुए कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने अपनी अधिकार सीमा का उल्लंघन किया, जब उन्होंने एक संघीय आपातकालीन शक्तियों वाले कानून का उपयोग करते हुए वैश्विक स्तर पर अपने "रेसिप्रोकल" टैरिफ लागू किए। बता दें, ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाया है।

बयान 

मुख्य न्यायाधीश ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा, "जब कांग्रेस ने अपने टैरिफ संबंधी अधिकार सौंपे, तो उसने ऐसा स्पष्ट शब्दों में और सख्त सीमाओं के अधीन किया। यदि कांग्रेस का इरादा टैरिफ लगाने की विशिष्ट और असाधारण शक्ति सौंपने का होता, तो वह इसे स्पष्ट रूप से व्यक्त करती, जैसा कि उसने अन्य टैरिफ कानूनों में किया है।" टैरिफ को रद्द करने का आदेश ट्रंप द्वारा नामित दो न्यायाधीशों- एमी कोनी बैरेट और नील गोरसच ने भी किया।

आदेश 

अन्य कानूनों के तहत लगेगा टैरिफ?

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दो निचली अदालतों द्वारा ट्रंप प्रशासन के खिलाफ निर्णय देने और टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द करने के बाद आया है। हालांकि, जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर विचार कर रहा था, तब तक ये शुल्क लागू ही थे। वहीं, ट्रंप अधिकारियों ने पहले ही कहा था कि यदि सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद्द कर दिए जाते हैं, तो वे अन्य कानूनों के तहत नए टैरिफ लगा देंगे।

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पिछले फैसले

टैरिफ पर अन्य कोर्ट ने पहले क्या कहा है?

सबसे पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने कहा था कि संविधान द्वारा कांग्रेस को टैरिफ शक्ति का स्पष्ट आवंटन होने के कारण अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) राष्ट्रपति को असीमित टैरिफ प्राधिकरण नहीं सौंपता है। अब कोर्ट ने कहा कि टैरिफ से जुड़े ट्रंप के आदेश राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। वहीं, वॉशिंगटन की एक संघीय कोर्ट ने भी कई टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।

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चुनौती 

किसने दी थी टैरिफ को चुनौती?

इन टैरिफ को उन व्यवसायों और 12 अमेरिकी राज्यों द्वारा चुनौती दी गई थी, जो इन टैरिफ से प्रभावित थे। इनमें से अधिकांश राज्यों में डेमोक्रेट पार्टी की सरकार है। कोर्ट का यह फैसला उन टैरिफ पर लागू नहीं होगा, जिन्हें 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए लागू किया गया था। जैसे- उद्योग-विशिष्ट स्टील, एल्यूमिनियम, लकड़ी और ऑटोमोबाइल पर लगाए गए टैरिफ।

जानकारी

क्या अमेरिका को वापस करना होगा पैसा?

रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा अब तक एकत्र किए गए करीब 175 अरब डॉलर (लगभग 16 लाख करोड़ रुपए) से अधिक के टैरिफ को वापस करना पड़ सकता है।

भारत

अमेरिका ने भारत पर लगाया था 50 प्रतिशत टैरिफ

अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा था। इसमें से 25 प्रतिशत रूस से तेल खरीदी को लेकर था। हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता हुआ था, जिसके तहत रूस से तेल खरीदी के कारण लगा 25 प्रतिशत टैरिफ हटा दिया गया, वहीं बाकी 25 प्रतिशत को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह व्यापार समझौता आगामी अप्रैल से लागू होने वाला है।

प्लस

क्या है टैरिफ?

टैरिफ एक ऐसा टैक्स है, जो दूसरे देश से आयात होने वाला सामान पर लगता है। आमतौर पर यह आयातित उत्पाद के लिए खरीदार द्वारा दी जाने वाली कीमत के प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है। अमेरिका में कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी 300 से ज्यादा चेकपॉइंट के जरिए टैरिफ इकट्ठा करती है। इसे वह कंपनी चुकाती है, जो उत्पाद आयात कर रही है, लेकिन ज्यादा टैरिफ का बोझ उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है।

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