LOADING...
डोनाल्ड ट्रंप के 15 प्रतिशत टैरिफ से भारत-चीन को फायदा, ब्रिटेन समेत कौन-कौन घाटे में?
ट्रंप के नए टैरिफ से किस देश पर क्या होगा असर

डोनाल्ड ट्रंप के 15 प्रतिशत टैरिफ से भारत-चीन को फायदा, ब्रिटेन समेत कौन-कौन घाटे में?

लेखन आबिद खान
Feb 23, 2026
11:15 am

क्या है खबर?

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए कानून के तहत सभी देशों पर पहले 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। बाद में इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। ये टैरिफ तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। इस कदम से भारत और चीन को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है, जबकि ब्रिटेन को नुकसान उठाना पड़ेगा। आइए नए टैरिफ का असर समझते हैं।

भारत

भारत का टैरिफ 50 से घटकर 15 प्रतिशत हुआ

भारत उन देशों में से है, जिसे ट्रंप के 15 प्रतिशत टैरिफ से फायदा होने जा रहा है। भारत पर पहले 25 प्रतिशत और फिर रूस से तेल खरीद के चलते अतिरिक्त 25 प्रतिशत यानी कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा था। इसके बाद व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बाद इसे घटाकर 18 प्रतिशत किया गया। नए टैरिफ के लिए ट्रंप ने जिस कानून का इस्तेमाल किया है, उसके तहत अधिकतम 15 प्रतिशत टैरिफ ही लगाया जा सकता है।

चीन

चीन को भी होने जा रहा फायदा

पिछले साल अमेरिका ने चीन पर अलग-अलग तरह का कुल 145 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिया था। हालांकि, बाद में ये कम हो गया था। सुप्रीम कर्ट के फैसले से पहले अमेरिका चीन पर लगभग 40 प्रतिशत टैरिफ लगा रहा था। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि अब चीन पर टैरिफ घटकर 24 प्रतिशत रह गया है। चीन ने कहा कि वह ट्रंप प्रशासन द्वारा टैरिफ को जारी रखने के कदम पर बारीकी से नजर रख रहा है।

Advertisement

ब्रिटेन

ब्रिटेन को झेलना पड़ेगा नुकसान

ब्रिटेन पर पहले 10 प्रतिशत टैरिफ लग रहा था, लेकिन अब उसे 15 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। ब्रिटिश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स का कहना है कि इससे ब्रिटेन से अमेरिका को होने वाले निर्यात की लागत 36,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है और 40,000 ब्रिटिश कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं। ब्रिटेन के मंत्री ब्रिजेट फिलिप्सन ने कहा कि वे इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ उच्चतम स्तर पर बातचीत कर रहे हैं।

Advertisement

यूरोपीय संघ

यूरोपीय संघ ने कहा- अमेरिका को व्यापार समझौता का सम्मान करना होगा 

यूरोपीय संघ ने कहा कि अमेरिका को पिछले साल हुए व्यापार समझौते की शर्तों का पालन करना चाहिए। संघ ने कहा, "अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के रूप में, यूरोपीय संघ को उम्मीद है कि अमेरिका संयुक्त वक्तव्य में निर्धारित अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करेगा, ठीक उसी तरह जैसे यूरोपीय संघ अपनी प्रतिबद्धताओं पर कायम है।" समझौते के तहत ज्यादातर यूरोपीय वस्तुओं पर अमेरिका ने अधिकतम 15 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था।

अन्य देश

और किन-किन देशों को हो सकता है नुकसान?

ग्लोबल ट्रेड अलर्ट के अनुसार, ब्रिटेन के बाद इटली और सिंगापुर को सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना है। वहीं, खबरें हैं कि यूरोपीय संघ व्यापार समझौते की पुष्टि की प्रक्रिया रोक सकता है। यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लैंग ने कहा, "जब तक हमारे पास एक व्यापक कानूनी मूल्यांकन और अमेरिका से स्पष्ट प्रतिबद्धताएं नहीं आ जातीं, हम समझौते को मंजूरी देने पर विधायी कार्य को रोकने का प्रस्ताव रखेंगे।"

Advertisement