क्या सफल होगी ईरान-अमेरिका वार्ता? परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल और होर्मुज समेत इन मुद्दों पर मतभेद
क्या है खबर?
युद्ध शुरू होने के बाद ईरान और अमेरिका कल पहली बार सीधी वार्ता करने जा रहे हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने जा रही इस बैठक से पहले कई तरह की अनिश्चितताओं ने वार्ता के नतीजों को लेकर संशय की स्थिति पैदा कर दी है। लेबनान पर इजरायल के लगातार हमले, ईरान-अमेरिका में नाजुक युद्धविराम और युद्ध रोकने की शर्तों को लेकर अस्पष्टता ने चुनौतियों को बढ़ा दिया है।
प्रस्ताव
युद्धविराम को लेकर दोनों के विरोधाभासी प्रस्ताव
युद्धविराम की चर्चा की शुरुआत से ही छोटी-छोटी बातों पर स्थिति साफ नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका को ईरान से 10 सूत्रीय प्रस्ताव मिला है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के एक अलग 15 सूत्रीय प्रस्ताव का जिक्र किया है। दोनों ही प्रस्ताव सार्वजनिक तौर पर जारी नहीं किए गए हैं। इस वजह से आम सहमति बनाना बड़ी चुनौती है।
परमाणु कार्यक्रम
परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पर टकराव
अमेरिका ने कहा है कि ईरान को परमाणु संयंत्रों को नष्ट करना होगा, यूरेनियम संवर्धन बंद करना होगा, भंडारों को विदेशों में स्थानांतरित करना होगा और गहन अंतरराष्ट्रीय निरीक्षणों को स्वीकार करना होगा। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होंगे। वहीं, ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते में परमाणु अप्रसार संधि के तहत नागरिक उपयोग के लिए यूरेनियम संवर्धन करने का अधिकार दिया जाना चाहिए।
मिसाइल
ईरान का मिसाइल कार्यक्रम भी विवाद की वजह
अमेरिका ने ईरान के सामने मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म करने की शर्त रखी है। खासतौर पर बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को। हालांकि, ईरान का मानना है कि ये आत्मसमर्पण जैसा है, क्योंकि ईरान के लिए उसका मिसाइल कार्यक्रम सैन्य और रक्षात्मक अभियान का सबसे अहम हिस्सा है। हालिया युद्ध में भी ईरान ने अपनी मिसाइलों के जरिए इजरायल-अमेरिका दोनों को चौंकाया है। भारी नुकसान के बावजूद ईरान की मिसाइल क्षमता अभी भी निर्णायक बताई जाती है।
होर्मुज
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाना चाहता है ईरान
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल का 20 प्रतिशत गुजरता है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इसे बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ी हैं। अमेरिका का कहना है कि होर्मुज से निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करनी होगी, जबकि ईरान यहां जहाजों से टोल वसूलने की योजना बना रहा है। कथित तौर पर कुछ जहाजों से टोल वसूला भी गया है।
प्रतिबंध
प्रतिबंधों में भी छूट चाहता है ईरान
अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाला है। ईरान की मांग है कि ये प्रतिबंध हटाए जाए और विदेशों में फ्रीज की गई उसकी संपत्तियों को सौंपा जाए। ईरान ने इसे सबसे अहम शर्त के तौर पर पेश किया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया है कि टैरिफ और प्रतिबंधों में राहत पर चर्चा चल रही है, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है।
वार्ता
वार्ता के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा
अमेरिका और ईरान के बीच 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता होनी है। इसके लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है, जिसका प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर और सैन्य अधिकारी ब्रैड कूपर भी हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उप विदेश मंत्री मजीद तख्त खांची के भी शामिल होने की खबर है।