मिथोस AI मॉडल के खतरे को समझने में जुटीं केंद्र सरकार और बड़ी टेक कंपनियां
क्या है खबर?
एंथ्रोपिक के नेक्स्ट-जेनरेशन मिथोस AI मॉडल को लेकर भारत ने बड़ा कदम उठाया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई अहम सरकारी और वित्तीय डिजिटल सिस्टम की जांच की जा रही है। इसका मकसद AI मॉडल से जुड़ी संभावित साइबर कमजोरियों को समझना है। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया में सरकारी एजेंसियों के साथ बड़ी टेक कंपनियां भी शामिल हैं। आने वाले समय में डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने के लिए इसे काफी अहम तैयारी माना जा रहा है।
वजह
क्यों की जा रही है यह तैयारी?
यह जांच इसलिए की जा रही है, ताकि AI से जुड़े संभावित साइबर खतरों को समय रहते समझा जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, नई तकनीक जहां काम आसान बना रही है, वहीं उससे सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। सरकार चाहती है कि बैंकिंग और जरूरी ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह सुरक्षित रहें। इसी वजह से सिस्टम की कमजोरियों को पहले ही पहचानकर उन्हें ठीक करने पर जोर दिया जा रहा है।
काम
बड़ी कंपनियां भी कर रहीं काम
रिपोर्ट के अनुसार, इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी कई अन्य बड़ी भारतीय कंपनियां भी सरकार के समान इस काम में लगी हैं। बताया गया है कि इंफोसिस अपने बैंकिंग सॉफ्टवेयर की सुरक्षा को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है। वहीं सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In भी कई डिजिटल प्लेटफॉर्म की जांच कर रही है। इसमें जरूरी ऑनलाइन सेवाओं की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
बातचीत
अमेरिका के साथ भी बनी हुई बातचीत
भारत इस मामले में अमेरिका के साथ भी बातचीत कर रहा है। भारत चाहता है कि इस नई AI तकनीक को सुरक्षित माहौल में अच्छी तरह समझा और परखा जा सके। इसके लिए जरूरी तैयारी भी की जा रही है। जानकार मानते हैं कि जैसे-जैसे डिजिटल सिस्टम बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा की अहमियत भी बढ़ रही है। ऐसे में भारत की यह तैयारी आगे के लिए एक जरूरी और बड़ा कदम मानी जा रही है।