बांग्लादेश में आम चुनाव: किसके बीच मुकाबला, कौन आगे और भारत की क्यों रहेंगी नजरें?
क्या है खबर?
बांग्लादेश में कल यानी 12 फरवरी को आम चुनाव होना है। देश को 35 साल बाद नया प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बांग्लादेश छोड़ दिया है और खालिदा जिया का निधन हो गया है। ये दोनों नेता ही बीते 35 सालों से बांग्लादेश की सत्ता के केंद्र में थे। हाल ही में संबंधों में तनाव और कट्टरपंथी जमात के उदय के कारण इन चुनावों पर भारत की भी नजरें रहेंगी।
पार्टियां
किस-किसके बीच है मुकाबला?
चुनाव में सीधा मुकाबला खालिदा जिया के बेटे तारीक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच है। युवा कार्यकर्ताओं की पार्टी राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी (NCP) ने जमात के साथ गठबंधन किया है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध है। 2024 में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में पार्टी की भूमिका के चलते यह फैसला लिया गया है।
जानकारी
कौन है आगे?
पिछले साल दिसंबर में अमेरिका के इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट के एक सर्वे में सामने आया था कि BNP को 33 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन है। वहीं, जमात मामूली अंतर के साथ 29 प्रतिशत मतदाताओं की पंसद है।
चुनाव
बांग्लादेश में कैसे होते हैं चुनाव?
बांग्लादेश में एक ही संसद है, जिसमें कुल 350 सीटें है। इसमें से 50 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं और बाकी 300 सीटों पर हर 5 साल में चुनाव होते हैं। भारत की तरह सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतता है। फिर बहुमत मिलने वाली पार्टी या गठबंधन अपने नेता को चुनते हैं, जो प्रधानमंत्री बनता है। बांग्लादेश में 18 साल से ज्यादा उम्र का हर व्यक्ति मतदान कर सकता है।
मतदाता
12.77 करोड़ मतदाता लेंगे चुनावों में हिस्सा
31 अक्टूबर, 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, बांग्लादेश में 12.77 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें डाक मतपत्र के जरिए मतदान के लिए पंजीकृत मतदाता भी शामिल हैं। यह पहली बार है, जब डाक द्वारा मतदान की सुविधा प्रदान की जा रही है। सरकार बनाने के लिए 151 सीटें जीतना जरूरी होता है। इस बार मतगणना में ज्यादा समय लग सकता है, क्योंकि जुलाई, 2025 के राष्ट्रीय चार्टर पर जनमत संग्रह के लिए भी मतदान होना है।
अहमियत
बांग्लादेश के लिए कितने अहम हैं चुनाव?
हसीना के निर्वासन, जनमत संग्रह पर मतदान, अवामी लीग पर प्रतिबंध और जमात के उदय के बीच चुनावों को बांग्लादेश के लिए अहम माना जा रहा है। अल जजीरा से बात करते हुए बांग्लादेश के इंडिपेंडेंट विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ताहमिद रेजवान ने कहा, "परिणाम जो भी हो, बांग्लादेश के राजनीतिक पथ पर इसका गहरा असर होगा। जनमत संग्रह का परिणाम इस बात का अहम संकेतक होगा कि छात्र विद्रोह की राजनीतिक भावना अभी मजबूत है या कमजोर पड़ रही है।"
अवामी लीग
चुनावों में हसीना की गैरमौजूदगी के क्या हैं मायने?
चुनावों में हसीना की अनुपस्थिति भारत के लिए चिंता का विषय है। हसीना हमेशा से भारत समर्थक रही हैं और उनके कार्यकाल में भारत के साथ सुरक्षा, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में संबंध बेहद घनिष्ठ रहे। हसीना की गैरमौजूदगी में भारत ने बांग्लादेश के साथ अपने राजनीतिक संबंधों में विविधता लाने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खालिदा जिया के निधन पर शोक संदेश भेजा था। विदेश मंत्री एस जयशंकर जिया के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे।
भारत
चुनावों पर भारत की क्यों रहेंगी नजरें?
जमात के नेताओं के भारत विरोधी बयान और पाकिस्तान से उनकी नजदीकी। बांग्लादेश में नई सरकार बनने से पूर्वोत्तर में उग्रवाद बढ़ सकता है। पूर्वोत्तर के 5 राज्यों से बांग्लादेश की सीमा लगती है। भारत सिलीगुड़ी कॉरिडोर और उसे लेकर बांग्लादेशी नेताओं के बयानों से चिंतित है। यह संकरा गलियारा भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर से जोड़ता है। बांग्लादेश भारत से दूरी के साथ चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी।