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करण जौहर का मजाक उड़ाना कैरी मिनाटी को पड़ा भारी, मुंबई कोर्ट ने दिया सख्त आदेश
कैरी मिनाटी अब करण जौहर पर वीडियो नहीं बना पाएंगे (तस्वीर: इंस्टाग्राम/@carryminati)

करण जौहर का मजाक उड़ाना कैरी मिनाटी को पड़ा भारी, मुंबई कोर्ट ने दिया सख्त आदेश

Feb 11, 2026
11:03 am

क्या है खबर?

करण जौहर और यूट्यूबर कैरी मिनाटी के बीच की जंग अब अदालत पहुंच गई है। करण के खिलाफ आपत्तिजनक वीडियो बनाना कैरी मिनाटी को इतना भारी पड़ा कि मुंबई कोर्ट ने अब उन पर सख्त पाबंदी लगा दी है। करण ने शिकायत की थी कि कैरी मिनाटी के वीडियो उनकी छवि को खराब कर रहे हैं, जिसके बाद कोर्ट ने ये फैसला सुनाया। आइए पूरा मामला विस्तार से जानते हैं।

फैसला

करण जौहर के पक्ष में फैसला

मुंबई की अदालत ने यूट्यूबर कैरी मिनाटी, दीपक चार समेत अन्य लोगों को करण जौहर के खिलाफ सोशल मीडिया पर मानहानिकारक सामग्री फैलाने से रोक दिया है। ये आदेश धर्मा प्रोडक्शंस के सीईओ अपूर्व मेहता की याचिका पर आया। करण जौहर को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उन्होंने अदालत में दावा किया था कि इन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने अपने यूट्यूब वीडियो के जरिए उनके खिलाफ बेहद अपमानजनक और मानहानिकारक बयान दिए हैं।

आपत्ति

अश्लील भाषा पर करण की आपत्ति

करण की याचिका में वीडियो की भाषा पर कड़ा ऐतराज जताया गया। कहा गया कि वीडियो में दिए गए बयान इतने अश्लील और अपमानजनक हैं कि उन्हें तुरंत हटाए जाने की जरूरत है। उधर अजय नागर की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने विवादित वीडियो पहले ही हटा लिए हैं। उनका तर्क था कि चूंकि वीडियो अब मौजूद नहीं हैं, इसलिए करण के पास कोर्ट आने की कोई ठोस वजह नहीं बचती और मामला यहीं खत्म हो जाना चाहिए।

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बकेब

करण का पलटवार और कोर्ट

करण ने इस पर कहा कि भले ही वीडियो हटा लिए गए हों, लेकिन उन्हें हटाए जाने से पहले लाखों लोग देख चुके थे, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को पहले ही नुकसान पहुंच चुका है। कोर्ट ने भी माना कि आरोप बेबुनियाद नहीं हैं। प्रथम दृष्टया पाया गया कि अजय नागर और दीपक चार ने मानहानिकारक और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया। जज ने स्पष्ट किया कि इस तरह के कंटेंट से किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाना सही नहीं है।

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आदेश

कोर्ट ने जारी किया करण पर बने वीडियो हटाने का फरमान

अदालत ने इस मामले को गंभीर माना और अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा, "इन वीडियो को तुरंत हटाए जाने की जरूरत है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन वीडियो को प्रसारित या दोबारा प्रसारित करने वाले सभी लोगों के खिलाफ भी निषेधाज्ञा जारी की जानी चाहिए। ये प्रतिवादियों के खिलाफ अंतरिम रोक लगाने के लिए बिल्कुल उपयुक्त मामला है।" अदालत ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को भी करण द्वारा चिन्हित किए गए सभी वीडियो लिंक हटाने का आदेश दिया।

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