अमरिंदर राजा वारिंग ने क्यों दिया पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा?
क्या है खबर?
पंजाब कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुए इस बदलाव ने पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को चर्चा में ला दिया है। कुछ महीनों से राज्य कांग्रेस में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। सचिन पायलट को प्रभारी बनाए जाने के बाद ये कदम उठाया गया है। आइए इसकी वजह समझते हैं।
रिपोर्ट
पायलट की रिपोर्ट के बाद सौंपा इस्तीफा
NDTV ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से बताया कि पायलट ने कांग्रेस आलाकमान को सौंपी रिपोर्ट में वारिंग के कामकाज और पंजाब में व्याप्त गुटबाजी का जिक्र किया था। इसी के बाद वारिंग से इस्तीफा देने को कहा गया।
पायलट ने दिल्ली में राज्य के सभी नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं और उनकी शिकायतों पर चर्चा की। उन्होंने पंजाब का दौरा भी किया था।
इसके बाद पायलट ने अपनी रिपोर्ट आलाकमान को सौंपी, जिसमें गुटबाजी का जिक्र था।
पायलट की नियुक्ति
पायलट को प्रभारी बनाए जाने के बाद से थी बदलाव की चर्चा
5 सितंबर को कांग्रेस ने पार्टी महासचिव सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया था। उन्होंने भूपेश बघेल की जगह ली थी।
पायलट की नियुक्ति ऐसे समय हुई थी, जब पंजाब कांग्रेस में वारिंग और चन्नी खेमे के बीच मतभेद चल रहे थे।
तब ये भी कहा जा रहा था कि बघेल वारिंग का पक्ष ले रहे थे। विरोधी गुटों ने शीर्ष नेतृत्व से शिकायत की थी कि बघेल मतभेदों को सुलझाने में अनुचित व्यवहार कर रहे थे।
अगला अध्यक्ष
कौन हो सकता है अगला अध्यक्ष?
अगले अध्यक्ष पद की दौड़ में पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला को सबसे आगे माना जा रहा है। अग्रवाल-बनिया समुदाय से ताल्लुक रखने वाले हिंदू सिंगला शहरी हिंदू मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उनके अलावा गुरदासपुर से सांसद और पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा, जालंधर कैंट से विधायक और पूर्व मंत्री परगट सिंह, अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला और राजा सांसी से विधायक और पूर्व मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया के नाम भी चर्चा में हैं।
विवाद
पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी को लेकर क्या है विवाद?
कांग्रेस ने 1 जुलाई को घोषणा की थी कि वारिंग पंजाब इकाई के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि चन्नी को चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इससे चन्नी खेमा नाराज हो गया।
3 जुलाई को करीब 20 विधायकों और नेताओं ने चन्नी के घर पर बैठक की और खुले तौर पर उनका समर्थन किया। इसके बाद बघेल ने चन्नी से मुलाकात की, लेकिन विवाद नहीं सुलझा। अब वारिंग को पद से हटाया गया है।