#NewsBytesExplainer: महिला आरक्षण और परिसीमन पर आगे क्या होगा, सरकार के सामने क्या-क्या हैं विकल्प?
क्या है खबर?
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक बीते दिन लोकसभा में पारित नहीं हो सका है। विधेयक को जरूरी दो तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। इसके बाद सरकार ने बाकी 2 विधेयकों को भी वापस ले लिया है। सरकार ने जहां इसे 'काला दिन' बताया है, तो वहीं विपक्ष ने महिला आरक्षण के पीछे परिसीमन की साजिश कहा है। आइए जानते हैं महिला आरक्षण पर आगे क्या हो सकता है।
विधेयक
तीनों विधेयकों का क्या हुआ?
केंद्र सरकार संसद के विशेष सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 लेकर आई थी। बीते दिन लोकसभा में सबसे पहले 131वां संशोधन विधेयक पेश किया गया। इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 सांसदों ने वोट किया। चूंकि ये संविधान संशोधन विधेयक था, इसलिए इसे पारित करने के लिए दो तिहाई वोट चाहिए थे, जो नहीं मिले। इसके बाद सरकार ने बाकी 2 विधेयकों को वापस ले लिया।
परिसीमन
अब कब होगा परिसीमन?
अगर सरकार कोई बदलाव नहीं करती है, तो अब परिसीमन 2026 की जनगणना के बाद होगा। 2002 में लाए गए 84वें संविधान संशोधन अधिनियम ने 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा एवं विधानसभाओं में सीटों की कुल संख्या पर लगी रोक 2026 तक बढ़ा दी थी। 2026 के बाद परिसीमन पर लगी रोक हट जाएगी। सरकार जनसंख्या के आधार पर परिसीमन कर पाएगी। इसके लिए जो कानून बनेगा, उसे सामान्य बहुमत से पारित कराया जा सकेगा।
आरक्षण
महिला आरक्षण अब कब लागू हो सकता है?
अब कम से कम 2029 तक महिला आरक्षण लागू नहीं हो सकेगा। माना जा रहा है कि 2034 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं को आरक्षण मिल सकता है। दरअसल, 2023 में सरकार ने जो महिला आरक्षण अधिनियम पारित किया था, उसके मुताबिक आरक्षण केवल परिसीमन के बाद ही लागू होगा, जो अगली जनगणना के बाद किया जाता है। यानी पहले जनगणना होगी फिर परिसीमन होगा और फिर महिला आरक्षण का रास्ता साफ होगा।
2023
2023 वाले महिला आरक्षण विधेयक का क्या होगा?
2023 में लगभग सभी पार्टियों ने सर्वसम्मति से महिला आरक्षण से जुड़ा 'नारी शक्ति वंदन विधेयक' पारित किया था। इसमें संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इस कानून को 16 अप्रैल, 2026 की रात को ही लागू किया गया है। ये कानून लागू रहेगा, लेकिन जमीन पर इसका असर देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि कानून में महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन और जनगणना की शर्त है।
अन्य विधेयक
बाकी 2 विधेयकों का क्या होगा?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पुष्टि की कि ये विधेयक आपस में जुड़े हुए हैं और संवैधानिक संशोधन पारित हुए बिना परिसीमन ढांचा आगे नहीं बढ़ सकता। इसके बाद बाकी दोनों विधेयकों को वापस ले लिया गया। इनमें केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी है, जिसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेशों की विधायी संरचनाओं को प्रस्तावित परिसीमन परिवर्तनों के अनुरूप बनाना और दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक समायोजन लागू करना था।
रणनीति
क्या होगी सरकार की आगे की रणनीति?
सरकार इस मुद्दे पर विपक्ष को महिला विरोध घोषित करने की कोशिश करेगी। कई केंद्रीय मंत्रियों ने अपने बयानों में ऐसा कहा भी है। माना जा रहा है कि सरकार को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में इसका फायदा मिल सकता है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। जब आप चुनाव में जाओगे, तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी, तब आपको भागने के लिए रास्ता नहीं मिलेगा।"