महिला आरक्षण: 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरा, सरकार को नहीं मिला दो तिहाई बहुमत
क्या है खबर?
महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 सांसदों ने वोट किया। विधेयक को बहुमत के लिए जरूरी दो तिहाई वोट नहीं मिल सके। इसके बाद सरकार ने बाकी 2 और विधेयकों को भी वापस ले लिया। विधेयकों पर बीते दिन करीब 13 घंटे और आज सुबह से चर्चा हो रही थी।
पहला विधेयक
54 वोटों से गिरा विधेयक
131वां संविधान संशोधन विधेयक पर कुल 528 सांसदों ने मतदान किया। विधेयक के पक्ष में 298 सदस्यों, जबकि 230 सदस्यों ने विरोध में वोट दिया। चूंकि ये संविधान संशोधन विधेयक था, इसलिए सदन में उपस्थित और कुल मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई वोट जरूरी थे। यानी विधेयक को पारित होने के लिए 352 वोट चाहिए थे, जो नहीं मिले। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बाकी दोनों विधेयकों को वापस ले लिया।
राहुल का बयान
राहुल ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, "हमने संविधान पर हुए इस हमले को हरा दिया है। हमने साफ तौर पर कहा है कि यह महिला आरक्षण विधेयक नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।" इससे पहले उन्होंने लोकसभा में कहा था, "इन विधेयकों का महिलाओं के कल्याण से कोई लेना-देना नहीं है। यह सिर्फ भारत के निर्वाचन क्षेत्र के नक्शे को बदलने के लिए है।"
ट्विटर पोस्ट
राहुल गांधी बोले- सरकार असंवैधानिक तरीका अपना रही थी
संशोधन विधेयक गिर गया।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 17, 2026
उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया।
भारत ने देख लिया।
INDIA ने रोक दिया।
जय संविधान।
प्रतिक्रिया
विधेयक के गिरने पर किसने क्या कहा?
अखिलेश यादव ने लिखा, 'इनकी फरेबी गाड़ी फिर से थमी रह गई, अब कहेंगे हमारी कोशिशों में कमी रह गई।' प्रियंका गांधी ने कहा, 'महिला आरक्षण को बदनीयती से 2011 की जनगणना और उस पर आधारित परिसीमन से जोड़कर प्रधानमंत्री जी का महिलाओं का मसीहा बनने का खोखला प्रयास आज नाकाम रहा।" तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा, 'तमिलनाडु ने दिल्ली को हराया! 23 अप्रैल को हम दिल्ली के घमंड को और उसका समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे!'
चर्चा
सरकार ने बुलाया था 3 दिन का विशेष सत्र
तीनों विधेयकों के लिए सरकार ने 3 दिन का विशेष सत्र बुलाया था। पहले विधेयकों को लोकसभा में पेश किया गया, जिस पर 21 घंटे चर्चा हुई। 56 महिला सांसदों समेत 130 सदस्यों ने विरोध और पक्ष में अपने तर्क रखे। इस दौरान खूब हंगामा देखने को भी मिला। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विधेयक पारित नहीं हुए तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी और देश की महिलाएं सब देख रही हैं।
अपील
प्रधानमंत्री ने की सांसदों से अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'मैं सभी सांसदों से कहूंगा आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए। देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है। उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं करिए। ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त होगी, लोकतंत्र और सशक्त होगा। आइए हम मिलकर आज इतिहास रचें। भारत की नारी को देश की आधी आबादी को उसका हक दें।'
विधेयक
तीनों विधेयकों के बारे में जानिए
केंद्र सरकार जो 3 विधेयक लाई थीं, उसमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल थे। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक में लोकसभा की सीटें 850 करने का प्रस्ताव है, जिससे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता खुलेगा। परिसीमन (संशोधन) विधेयक में परिसीमन आयोग के गठन और नई जनगणना आधारित सीटों का बंटवारा करने का प्रावधान है। तीसरे विधेयक में केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में संशोधन का प्रावधान है।