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#NewsBytesExplainer: मतदान से मतगणना तक EVM के साथ क्या होता है, कितनी सुरक्षा में रखी जाती है?
मतदान से लेकर मतगणना तक EVM की सुरक्षा कई स्तरों पर होती है

#NewsBytesExplainer: मतदान से मतगणना तक EVM के साथ क्या होता है, कितनी सुरक्षा में रखी जाती है?

लेखन आबिद खान
May 01, 2026
03:59 pm

क्या है खबर?

29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान हुआ था। इसके एक दिन बाद ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि स्ट्रॉन्ग रूम में रखी गई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई। उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया। इसे लेकर आधी रात को खूब हंगामा हुआ। आइए जानते हैं कि मतदान के बाद EVM के साथ क्या होता है।

प्रक्रिया

मतदान से पहले कहां रखी जाती हैं EVM?

मतदान से पहले, दौरान और बाद में EVM को कैसे और कहां रखा जाएगा, इसकी पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन मैनुअल, 2023 में दी गई है। चुनाव से पहले EVM जिला निर्वाचन अधिकारी के नियंत्रण में एक जगह रखी जाती हैं। चुनाव का ऐलान होने के बाद EVM को राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त पार्टियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में रैंडम तरीके से छांटा जाता है और हर विधानसभा के संबंधित स्ट्रॉन्गरूम में भेजा जाता है।

मतदान के बाद की प्रक्रिया

मतदान के बाद EVM का क्या होता है?

मतदान खत्म होने के बाद पीठासीन अधिकारी पहले EVM में दर्ज मतदान का टेस्ट करता है और फिर सभी उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट को इसकी एक-एक सत्यापित प्रति दी जाती है। इसके बाद EVM को सील कर दिया जाता है। इस सील पर पोलिंग एजेंट अपने हस्ताक्षर करते हैं। इसके बाद EVM को स्ट्रॉन्ग रूम ले जाया जाता है। जिन EVM का इस्तेमाल हुआ है, उन्हें अलग और जिनका नहीं हुआ है उन्हें अलग स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है।

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स्ट्रॉन्गरूम

कैसा होता है स्ट्रॉन्गरूम?

चुनाव आयोग के मुताबिक, स्ट्रॉन्गरूम में आने-जाने का सिर्फ़ एक ही रास्ता होना चाहिए। बाकी सभी दरवाजों-खिड़कियों को सील कर दिया जाना चाहिए। इस दरवाजे पर 2 ताले लगे होना चाहिए। पहले ताले की चाबी रिटर्निंग ऑफिसर (RO), जबकि दूसरे की असिस्टेंट RO के पास रहेंगी। स्ट्रॉन्गरूम में EVM रखने के लिए 6X2 फीट की शेल्फ होनी चाहिए। हर सुरक्षाकर्मी और अन्य अधिकृत अधिकारी को आने-जाने की एंट्री लॉग बुक में करनी होती है।

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सुरक्षा

कैसे होती है स्ट्रॉन्गरूम की सुरक्षा?

स्ट्रॉन्गरूम में हमेशा सशस्त्र पुलिस की कम से कम एक प्लाटून तैनात रहती है। 24 घंटे CCTV कैमरों से निगरानी की जाती है। स्ट्रॉन्गरूम के खुलने और बंद होने के समय की वीडियोग्राफी भी होती है। चुनाव आयोग स्ट्रॉन्गरूम की 3 स्तरीय सुरक्षा करता है। इसके 2 अंदरूनी स्तरों की सुरक्षा केंद्रीय बलों के हाथ में होती है, वहीं सबसे बाहरी स्तर की सुरक्षा राज्य पुलिस की होती है। RO रोजाना 2 बार पूरे स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा करते हैं।

मतगणना

मतगणना के दौरान क्या होता है?

EVM को स्ट्रॉन्ग रूम से मतगणना केंद्र तक भारी सुरक्षा में ले जाया जाता है। यह प्रक्रिया भी उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी और कैमरे में रिकॉर्ड होती है। मतगणना प्रक्रिया शुरू होने से पहले उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को EVM की सील और नियंत्रण इकाइयों की विशिष्ट ID दिखाई जाती है। मतगणना खत्म होने के बाद किसी आपत्ति की स्थिति में EVM को लगभग 45 दिनों के लिए फिर से स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है।

पोस्टल बैलेट

बैलेट पेपर को लेकर क्या हैं नियम?

सभी बैलेट पेपर को RO हर दिन के हिसाब से अलग-अलग लिफाफों में रखता है। इन्हें RO के कार्यालय में बने स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है। इसमें 2 लिफाफे और एक घोषणा पत्र होती है, जिसे खोला नहीं जा सकता। मतगणना के दिन सबसे पहले बैलेट पेपर की गिनती होती है। इनका इस्तेमाल सुरक्षाबल, आपातकालीन सेवाओं में तैनात कर्मचारी, 85 साल से ज्यादा उम्र के लोग और दिव्यांगजन मतदान के लिए करते हैं।

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