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वीडियो विवाद, मंत्रियों-विधायकों को अकाल तख्त का समन; भगवंत मान के सामने कितनी बड़ी सियासी चुनौती? 
वीडियो विवाद और अकाल तख्त के समन ने भगवंत मान की परेशानियां बढ़ा दी है

वीडियो विवाद, मंत्रियों-विधायकों को अकाल तख्त का समन; भगवंत मान के सामने कितनी बड़ी सियासी चुनौती? 

लेखन आबिद खान
Jun 28, 2026
05:57 pm

क्या है खबर?

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शायद अपने सियासी करियर की सबसे बड़ी चुनौती से जूझ रहे हैं। उनके एक कथित वीडियो को लेकर उपजे विवाद ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं। इस मामले में सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त भी सक्रिय हो गया है। ऐसा लग रहा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेतृत्व का भी मान को साथ नहीं मिल रहा है। आइए जानते हैं मान के सामने कितनी बड़ी चुनौती है।

शुरुआत

कैसे हुई विवाद की शुरुआत?

दरअसल, अक्टूबर 2025 में कनाडा के एक शख्स ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें मान जैसा दिखने वाला व्यक्ति सिख गुरुओं की तस्वीरों पर शराब के छींटे मार रहा है। इसके अलावा जरनैल सिंह भिंडरावाले की फोटो पर भी आपत्तिजनक हरकतें करता दिख रहा है। शख्स ने दावा किया कि वीडियो में दिख रहा शख्स मान है। इस मामले पर अकाल तख्त ने मान को गुरुओं की बेअदबी का दोषी माना। हालांकि, मान आरोपों को नकारते रहे हैं।

रिपोर्ट

फोरेंसिक रिपोर्ट को लेकर दावों ने और बढ़ाई मान की मुश्किलें

मान ने कथित बेअदबी वाले वीडियो की फोरेंसिक जांच कराई। इसमें दावा किया गया कि वीडियो फर्जी था। हालांकि, इस बीच एक बड़े घटनाक्रम में गुरुग्राम पुलिस ने FIR दर्ज कर 2 लोगों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन्होंने लाखों रुपये देकर वीडियो की फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट बनवाई। इस मामले में पंजाब पुलिस के 2 शीर्ष अधिकारी भी लपेटे में आए। गुरुग्राम की एक होटल से उनके वीडियो सामने आए।

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समन

अकाल तख्त ने सिख विधायकों-मंत्रियों को किया तलब

अकाल तख्त ने पंजाब के सभी सिख विधायकों और मंत्रियों को 29 जून की सुबह 11 बजे तलब किया है। वहीं, गैर-सिख विधायकों और मंत्रियों से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा गया है। यह बुलावा बेअदबी रोधी कानून 'जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026' के संबंध में है। पंजाब सरकार ने इसी साल बेअदबी रोधी कानून पारित किया था, जिसमें बेअदबी के मामलों में उम्रकैद से लेकर सख्त सजा के प्रावधान हैं।

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AAP

क्या विवाद को लेकर अकेले पड़ गए हैं मान?

इस मामले में AAP के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी मान की परेशानी बढ़ा रही है। हालांकि, शुरुआत में मान पूरी तरह अकेले नहीं थे। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सार्वजनिक रूप से उनका बचाव किया था, लेकिन गुरुग्राम पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने के बाद मान अकेले दिखाई दिए। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पार्टी के भीतर कई नेता निजी तौर पर मानते हैं कि निजी फोरेंसिक रिपोर्ट पर भरोसा करना उल्टा पड़ा।

दुविधा

AAP नेताओं के सामने क्या है दुविधा?

रिपोर्ट के मुताबिक, कई सिख विधायक निजी तौर पर मानते हैं कि अकाल तख्त के आदेश ने उन्हें मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। एक AAP विधायक ने कहा, "सभी AAP विधायकों और मंत्रियों को जो समन भेजा गया है, वह एक बड़ी बात है। मान को खुद समन नहीं भेजा गया है। 117 सदस्यों वाली विधानसभा में वे अकेले ऐसे सदस्य हैं जिन्हें 29 जून को अकाल तख्त के सामने पेश होने के लिए नहीं कहा गया है।"

बैठक

मान ने की AAP नेताओं के साथ बैठक

अकाल तख्त ने 29 जून को विधायकों-सांसदों को तलब किया है। उससे पहले मान ने सभी नेताओं के साथ बैठक की। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में नेतृत्व की प्रतिक्रिया को अंतिम रूप दिया गया और यह तय किया गया कि क्या विधायकों को अकाल तख्त के सामने एक साथ पेश होना चाहिए या नहीं। मान के लिए इसलिए भी चुनौती बड़ी है, क्योंकि अकाल तख्त ने उनके बहिष्कार की अपील की है।

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