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NALSAR विवाद पर बार काउंसिल को फटकार, CJI ने कहा- यह छात्रों और मेरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR विवाद पर BCI को फटकार लगाई है

NALSAR विवाद पर बार काउंसिल को फटकार, CJI ने कहा- यह छात्रों और मेरा मामला

Aug 14, 2026
11:19 am

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (14 अगस्त) स्पष्ट किया है कि छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है और इसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को हस्तक्षेप करने का कोई हक नहीं है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) के साल 2026 के स्नातक बैच के छात्रों के पक्ष में खड़े होते हुए उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर तुरंत रोक लगा दी है।

टिप्पणी

CJI ने मामले पर क्या की टिप्पणी?

CJI ने सुनवाई के दौरान BCI द्वारा छात्रों के वकालत पंजीकरण पर रोक लगाने वाले परिपत्र पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा, "अगर उनके विरोध करने का कोई कारण है, तो BCI का इससे कोई लेना-देना नहीं है। यह मेरे और छात्रों के बीच का संवाद है। छात्रों को विरोध करने का अधिकार है और BCI इसमें हस्तक्षेप करने वाले कौन होते हैं? BCI का इससे कोई सरोकार नहीं है कि छात्र क्या कर रहे हैं।"

स्पष्ट

मैं भी छात्र गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा- CJI

CJI ने कहा कि जब वे छात्र थे तब वे स्वयं छात्र गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे और छात्रों को शांतिपूर्वक अपनी आवाज उठाने की अनुमति दी जानी चाहिए।

लाइव लॉ के अनुसार उन्होंने कहा, "मैं भी छात्र रहते हुए छात्र गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था। वे शांतिपूर्वक अपनी आवाज उठा रहे हैं और उन्हें इसकी अनुमति दी जानी चाहिए।"

मौखिक सुनवाई के दौरान मामले पर विचार किया गया और सर्वोच्च न्यायालय ने नोटिस जारी किया।

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निर्देश

कोर्ट ने दिए यह निर्देश

इस बीच कोर्ट ने निर्देश दिया कि BCI या किसी भी राज्य बार काउंसिल द्वारा किसी भी विधि विश्वविद्यालय के छात्रों या संकाय के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

BCI के वकील ने बताया कि विवादित आदेश पहले ही वापस ले लिया गया है।

इस पर CJI ने कहा, "कृपया सभी छात्रों को नामांकन कराने और सुप्रीम कोर्ट बार में शामिल होने के लिए कहें, हम उन्हें कानूनी सहायता पाठ्यक्रमों के लिए सूचीबद्ध करेंगे।"

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प्रकरण

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब NALSAR के दीक्षांत समारोह 2026 में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने का प्रस्ताव रखा गया।

विश्वविद्यालय के स्नातक होने वाले छात्रों ने CJI को बुलाने का कड़ा विरोध शुरू कर दिया।

छात्रों का आरोप था कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादतियों और लाठीचार्ज से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI की टिप्पणियां और उनका आचरण न्यायसंगत नहीं था।

कार्रवाई

BCI ने छात्रों ने खिलाफ जारी किया परिपत्र

छात्रों के इस विरोध से नाराज होकर वकीलों की नियामक संस्था BCI ने कड़ा रुख अपनाया।

BCI ने 13 अगस्त को सभी राज्य बार काउंसिलों को एक परिपत्र जारी कर निर्देश दिया कि वे 2026 में हैदराबाद के NALSAR विधि विश्वविद्यालय से स्नातक करने वाले किसी भी छात्र को अगले आदेश तक अधिवक्ता के रूप में नामांकित न करें।

इससे NALSAR से स्नातक करने वाले छात्रों का कानूनी करियर शुरू होने से पहले ही संकट में पड़ गया।

रिपोर्ट

BCI अध्यक्ष ने मांगी प्रामाणिक रिपोर्ट

BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने NALSAR के कुलपति से 3 दिनों के भीतर एक प्रामाणिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा था, जिसमें अभियान को शुरू करने, आयोजित करने, समन्वय करने या जुटाने में मुख्य रूप से शामिल छात्रों की पहचान करने की मांग की गई थी।

इसके बाद 14 अगस्त को वरिष्ठ अधिवक्ता के परमेश्वर ने CJI की पीठ के समक्ष इस गंभीर विषय का मौखिक रूप से उल्लेख किया। इस पर CJI ने सख्त टिप्पणी की है।

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