क्या TMC का हो जाएगा शिवसेना जैसा हाल, या ममता बनर्जी रोक पाएंगी बगावत?
क्या है खबर?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी शायद अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही हैं। पहले विधानसभा चुनाव में हार, फिर TMC कार्यकर्ताओं पर हमले और अब संभावित बगावत की खबरों ने पार्टी के अस्तित्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है। TMC विधायकों का बड़ा हिस्सा होटलों में बैठक कर रहा है, स्पीकर से मिलने की तैयारी कर रहा है। इससे अटकलें हैं कि जल्द ही शिवसेना की तरह TMC भी टूट सकती है।
अटकलें
क्यों लग रही हैं बगावट की अटकलें?
दरअसल, TMC के प्रवक्ता रहे रिजु दत्ता ने दावा किया है कि 50 से ज्यादा विधायक खुद को असली TMC घोषित करने की तैयारी कर रहे हैं और ऋतब्रता बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में समर्थन दे रहे हैं। कथित तौर पर ये सभी विधायक विधानसभा स्पीकर से मिलने की तैयारी कर रहे हैं और दावा करेंगे कि वे ही असली TMC है। कथित तौर पर ये विधायक पार्टी के चुनाव चिन्ह पर भी दावा करेंगे।
बैठक
बागी विधायकों ने कोलकाता के होटल में की बैठक
खबर है कि 1 जून को संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में कोलकाता के एक होटल में TMC विधायकों की बैठक हुई थी। इसमें ममता के कुछ वफादार विधायक भी शामिल हुए। संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को कल ही TMC ने पार्टी विरोध गतिविधियों के चलते पार्टी से निकाल दिया था। अटकलें हैं कि ममता और अभिषेक बनर्जी से अलग होकर ये विद्रोही गुट पार्टी की विरासत पर दावा कर सकता है।
इस्तीफे
लगातार ममता का साथ छोड़ रहे पार्टी नेता
विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद कई नगर निकायों में TMC के 100 से ज्यादा पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। भाटपारा, हलीशहर और डायमंड हार्बर जैसे TMC के गढ़ों में भी नेताओं ने ममता का साथ छोड़ दिया है। TMC के बड़े नेता अभिजीत मजूमदार और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भी पार्टी छोड़ दी है। दावा है कि कई और बड़े नेता भी ऐसा ही कदम उठा सकते हैं।
ममता की बैठक
ममता ने बुलाई विधायकों की बैठक, 80 में से 20 ही पहुंचे
31 मई को पार्टी कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों को लेकर ममता ने विधायकों की बैठक बुलाई थी। इसमें 80 में से केवल 20 विधायक ही पहुंचे। TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने विधायकों की अनुपस्थिति का बचाव करते हुए कहा कि वे अभिषेक पर हुए हमले के बाद विरोध कार्यक्रमों की तैयारी कर रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया कि इसके बावजूद 20 विधायकों के साथ ही बैठक हुई। इस दौरान ममता ने विधायकों से अनौपचारिक चर्चा की।
वजह
क्यों TMC छोड़ रहे हैं नेता?
वरिष्ठ पत्रकार प्रसून आचार्य ने द लल्लनटॉप से कहा, "ममता ने उम्मीदवारों का चयन मुख्य रूप से जीतने की क्षमता के आधार पर किया। कई लोग वैचारिक रूप से TMC से गहराई से जुड़े नहीं थे। ऐसे नेताओं को वैचारिक रूप से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।" वहीं, वरिष्ठ पत्रकार शिखा मुखर्जी ने कहा, "TMC नेताओं में यह भावना है कि पार्टी अब मजबूत नहीं रही। नेताओं को लग रहा है कि उन्हें भविष्य को लेकर सोचना शुरू कर देना चाहिए।"
भाजपा
TMC नेताओं के स्वागत के लिए भाजपा कितनी तैयार?
रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि कई TMC नेता भाजपा में जाने को तैयार हैं, लेकिन भाजपा ने सहमति नहीं दी है। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, "TMC के लिए हमारे दरवाजे बंद हैं। हमने किसी को बाहर से लाए बिना 207 का आंकड़ा छू लिया। हमारी राजनीतिक रणनीति जमीनी स्तर से शुरू हुई। हम ऐसे लोगों को अपनी पार्टी में कैसे शामिल कर सकते हैं जो दागी हैं? भाजपा का तृणमूलीकरण कभी नहीं होगा।"
बयान
घटनाक्रम पर ममता बनर्जी क्या कह रही हैं?
ममता ने विद्रोह को स्वीकार करते हुए आरोप लगाया कि कुछ TMC नेता अपने हितों की रक्षा में अधिक रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा, "पुलिस के दबाव के जरिए TMC विधायकों को धमकाया जा रहा है और उन्हें विशिष्ट व्यक्तियों से संपर्क करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।" उन्होंने ये भी कहा कि व्यक्तिगत हितों के लिए नेताओं के अलग होने से संगठन के पुनर्निर्माण में मदद मिलेगी और TMC इस संकट से और भी मजबूत होकर उभरेगी।