#NewsBytesExplainer: भारत-बांग्लादेश संबंधों के सामान्य होने में परेशानी बनेगा शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा?
क्या है खबर?
बांग्लादेश के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को जीत मिली है और तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। हालिया समय में संबंधों में आए तनाव के बाद भारत नई सरकार को रिश्तों में सुधार के मौके के तौर पर देख रहा है। तारिक ने भी कहा है कि वे भारत के साथ रचनात्मक संबंध चाहते हैं। जानतें हैं क्या शेख हसीना का मुद्दा इस राह में रोड़ा बन सकता है।
BNP
भारत से संबंधों को लेकर BNP ने क्या कहा?
BNP ने तारिक को बधाई देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया और कहा कि वह द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए भारत के साथ रचनात्मक सहयोग की उम्मीद करती है। तारिक के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा, "बांग्लादेश भारत के साथ नए सिरे से संबंध स्थापित करना चाहता है। हम संतुलित संबंध चाहते हैं। हम किसी एक देश के साथ विशेष संबंध नहीं रखेंगे और न ही किसी समझौते का खुलासा करेंगे।"
भारत
BNP की जीत पर कैसी रही भारत की प्रतिक्रिया?
प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले तारिक को जीत की बधाई दी। उन्होंने कहा, 'भारत एक लोकतांत्रिक, प्रोग्रेसिव और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा। मैं उनके साथ मिलकर हमारे रिश्तों को मजबूत करने और हमारे साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए काम करने का इंतजार कर रहा हूं।' प्रधानमंत्री मोदी ने तारिक से फोन पर भी बात की। तारिक के शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
प्रत्यर्पण
हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर BNP ने क्या कहा?
कबीर ने शेख हसीना को 1,500 से अधिक लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार 'आतंकवादी' बताया और भारत सरकार से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि हसीना या अवामी लीग के अन्य नेता बांग्लादेश की स्थिरता को प्रभावित करने वाले भारत की धरती का इस्तेमाल न करें। कबीर ने कहा है कि भारत में हसीना की मौजूदगी पर चिंता का सबब है। वहीं, तारिक ने कहा कि हसीना का प्रत्यर्पण कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञ
क्या कह रहे हैं जानकार?
भू-राजनीतिक विश्लेषक प्रियजित देबसरकार ने BBC से कहा, "मेरा मानना है कि बांग्लादेश के इतिहास में अवामी लीग का समय अभी बचा है। फिलहाल हसीना को प्रत्यर्पित किए जाने की कोई वास्तविक संभावना नहीं है। भारत नई सरकार के साथ अच्छे रिश्ते चाहेगा, लेकिन अवामी लीग के नेता, जिनमें हसीना भी शामिल हैं, के फिलहाल भारत में ही रहने की संभावना है। आगे क्या होगा, यह चुनाव के बाद की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।"
तारिक के लिए चुनौती
तारिक के लिए भी चुनौती बन सकता है ये मुद्दा
बांग्लादेश में हसीना के प्रत्यर्पण की मांग खत्म नहीं हुई है। चुनाव जीतने के बाद कई BNP नेताओं ने भी इस संबंध में बयान दिए हैं। घरेलू राजनीति में ये तारिक के लिए भी अच्छी स्थिति नहीं है। जमात-ए-इस्लामी भले ही चुनाव हार गई हो, लेकिन वो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसकी संसद में मौजूदगी तारिक को इस मुद्दे पर घेर सकती है। तारिक के लिए ये आसान स्थिति नहीं होगी।
संधि
क्या भारत-बांग्लादेश में प्रत्यर्पण संधि है?
भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में हसीना के कार्यकाल में ही प्रत्यर्पण संधि हुई थी। इसके तहत दोनों देश ऐसे व्यक्तियों का प्रत्यर्पण करेंगे, जिनके खिलाफ अदालत में मुकदमा लंबित है या वो किसी आरोप का सामना कर रहे हैं या किसी अपराध में दोषी पाए गए हैं। संबंधित शख्स का अपराध कम से कम एक साल सजा के प्रावधान वाला होना चाहिए। संधि के दायरे में वित्तीय अपराध भी आते हैं।