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क्या भारत शेख हसीना के प्रत्यर्पण से कर सकता है इनकार और क्या कहती है संधि?
क्या शेख हसीना के प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है भारत?

क्या भारत शेख हसीना के प्रत्यर्पण से कर सकता है इनकार और क्या कहती है संधि?

Nov 18, 2025
02:32 pm

क्या है खबर?

बांग्लादेश में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध का दोष्ज्ञी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है। उसके बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत से प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए हसीना को वापस सौंपने की मांग की है। हालांकि, अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत हसीना को प्रत्यर्पित करेगा या इससे इनकार करेगा और दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि क्या कहती है। आइए जानते हैं।

बयान

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा, "आज फैसले में ICT ने जुलाई नरसंहार के लिए शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल को सजा सुनाई है। मानवता के विरुद्ध अपराधों के दोषी इन व्यक्तियों को शरण देना किसी देश के लिए अमित्रतापूर्ण व्यवहार का गंभीर उदाहरण और न्याय का उपहास होगा। हम भारत सरकार से दोनों को तुरंत बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंपने का आग्रह करते हैं। दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत यह भारत का दायित्व भी है।"

जवाब

भारत ने क्या दिया जवाब?

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी बांग्लादेश के प्रत्यर्पण के आग्रह पर बयान जारी किया है। मंत्रालय ने कहा, "भारत ने शेख हसीना के संबंध में बांग्लादेश के ICT द्वारा सुनाए गए फैसले पर ध्यान दिया है। एक निकट पड़ोसी के रूप में, भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें उस देश में शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और स्थिरता शामिल है। हम इस दिशा में सभी हितधारकों के साथ हमेशा रचनात्मक रूप से जुड़े रहेंगे।"

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संधि

भारत-बांग्लादेश के बीच कब हुई थी प्रत्यर्पण संधि? 

भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में हसीना के कार्यकाल में ही प्रत्यर्पण संधि हुई थी। इसके तहत दोनों देश ऐसे व्यक्तियों का प्रत्यर्पण करेंगे, जिनके खिलाफ अदालत में मुकदमा लंबित है या वो किसी आरोप का सामना कर रहे हैं या किसी अपराध में दोषी पाए गए हैं। संबंधित शख्स का अपराध कम से कम 1 साल सजा के प्रावधान वाला होना चाहिए। संधि के दायरे में वित्तीय अपराध भी आते हैं।

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सवाल

क्या भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है?

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्यर्पण संधियों का सम्मान आमतौर पर सद्भावना और न्याय के हित में किया जाता है, लेकिन भारतीय कानून और द्विपक्षीय संधि दोनों ही भारत को महत्वपूर्ण विवेकाधिकार देते हैं, खासकर अनुरोध राजनीतिक रूप से प्रेरित या अन्यायपूर्ण प्रतीत हो। भारत के प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 के तहत, केंद्र के पास परिस्थितियों के आधार पर प्रत्यर्पण से इनकार करने, कार्यवाही पर रोक लगाने या वांछित व्यक्ति को मुक्त करने की स्पष्ट शक्तियां हैं।

शक्ति

भारत इस धारा के तहत हसीना के प्रत्यर्पण से कर सकता है इनकार

भारत के प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 29 स्पष्ट करती है कि भारत अनुरोध के तुच्छ प्रतीत होने या सद्भावना से नहीं किए जाने, अनुरोध के राजनीति से प्रेरित होने और प्रत्यर्पण के न्याय के हित में नहीं होने की स्थिति में किसी भी प्रत्यर्पण के अनुरोध को खारिज कर सकता है। यह अधिनियम केंद्र सरकार को किसी भी समय कार्यवाही पर रोक लगाने, वारंट रद्द करने या वांछित व्यक्ति को बरी करने का अधिकार भी देता है।

इनकार

भारत भगोड़ों के प्रत्यर्पण से कब कर सकता है इनकार?

प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 31 भगोड़ों के प्रत्यर्पण अनुरोध से इनकार करने से संबंधित है। इसमें कहा गया है कि अगर, किसी भगोड़े के खिलाफ आरोप राजनीतिक प्रकृति का हो या अभियुक्त यह साबित कर दे कि अनुरोध राजनीतिक अपराध के लिए उन पर मुकदमा चलाने/दंडित करने के लिए किया गया था। इसी तरह अनुरोधकर्ता देश के के कानूनों के तहत अभियोजन पर प्रतिबंध होता है तो प्रत्यर्पण के अनुरोध से इनकार किया जा सकता है।

जानकारी

धारा 31(C) के तहत भी किया जा सकता है इनकार

धारा 31(C) भी प्रत्यर्पण पर तब तक रोक लगाती है जब तक कि संधि यह सुनिश्चित न कर दे कि व्यक्ति पर केवल प्रत्यर्पण अपराध या समान तथ्यों से उत्पन्न कोई छोटे अपराध के तहत ही मुकदमा चलाया जाएगा।

द्विपक्षीय

भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि क्या कहती है?

भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 6 के तहत अगर अपराध राजनीतिक है तो प्रत्यर्पण से इनकार कर सकते हैं। हालांकि, संधि स्पष्ट करती है कि हत्या, आतंकवाद, विस्फोट, आग्नेयास्त्र उल्लंघन, अपहरण, गंभीर हमले और बहुपक्षीय अपराध-विरोधी संधियों के तहत अपराधों सहित गंभीर अपराधों को राजनीतिक नहीं माना जाएगा। इसी तरह अनुच्छेद 7 के तहत भारत कथित अपराध के लिए व्यक्ति पर स्वयं मुकदमा चलाने की कहकर प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है। हालांकि, ऐसा न होने पर प्रत्यर्पण करना होगा।

अन्य

अनुच्छेद 8 और 21 क्या कहता है?

भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि का अनुच्छेद 8 कहता है कि अगर अभियुक्त साबित कर दे कि प्रत्यर्पण अनुचित या दमनकारी है, अपराध मामूली है, ज्यादा समय बीच चुका है, आरोप में सद्भावना का अभाव है और अपराध पूरी तरह से सैन्य प्रकृति का है तो भी प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है। इसी तरह अनुच्छेद 21 के तहत कोई भी देश छह महीने के नोटिस पर संधि को समाप्त कर सकता है और संयुक्त राष्ट्र इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा।

कदम

भारत अब क्या उठा सकता है कदम?

भारत-बांग्लादेश की प्रत्यर्पण संधि से स्पष्ट है कि कोई भी निर्णय, चाहे वह प्रत्यर्पण हो या इनकार, पूर्णतः द्विपक्षीय होगा। ऐसे में बांग्लादेश की ओर से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद भारत अब प्रत्यर्पण अधिनियम, द्विपक्षीय संधि के प्रावधानों और राजनीतिक प्रेरणा, उचित प्रक्रिया संबंधी चिंताओं या अन्यायपूर्ण अभियोजन के संभावित दावों के माध्यम से अनुरोध की जांच कर सकता है। उसके बाद ही हसीना के प्रत्यर्पण करने या इनकार करने पर कोई फैसला करेगा।

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