होर्मुज बंद, ईरान-अमेरिका के एक-दूसरे पर दोबारा हमले; क्या फिर होगी गैस और पेट्रोल की कमी?
क्या है खबर?
ईरान और अमेरिका के बीच जारी नाजुक युद्धविराम लगभग टूट गया है। अमेरिका ने आज ईरान में 140 ठिकानों पर हमला किया है। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत समेत 6 खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है। साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को भी दोबारा बंद कर दिया है। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। समझते हैं ताजा हमलों का भारत पर क्या असर होगा।
होर्मुज
होर्मुज का बंद होना भारत के लिए कितना चिंता की बात?
होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 5वां हिस्सा गुजरता है। खाड़ी देशों से भारत आने वाले जहाज भी इसी रास्ते से आते हैं। हालांकि, भारत ने अपने तेल आयात में विविधता लाकर होर्मुज से होकर गुजरने वाले कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता कम की है। लेकिन LPG अभी भी चिंता का विषय है। भारत कुल LPG का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से भी लगभग 90 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
परेशानी
होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा तो परेशानी तय
जानकारों का मानना है कि अगर होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा तो परेशानी बढ़ सकती है। अगर व्यवधान कम समय के लिए रहा तो इतनी बड़ी समस्या नहीं है। इसकी एक वजह ये है कि आमतौर पर तेल कंपनियां और सरकार कच्चे तेल और गैस का स्टॉक लेकर चलती हैं। तेल कंपनियां और रिफाइनरियों के बीच ऐसे अनुबंध भी आमतौर पर अगले 2-3 महीनों के लिए होते हैं।
कीमत
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं
ईरान पर अमेरिका के हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें करीब 3 प्रतिशत बढ़ गई हैं। 9 जुलाई को ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो इस आशंका को दर्शाती है कि संघर्ष से आपूर्ति बाधित हो सकती है। वहीं, ताजा संघर्ष के बाद अमेरिका ने ईरान को तेल निर्यात करने की जो छूट दे रखी थी, वो भी वापस ले ली है।
नागरिक
भारत के लिए नागरिकों की सुरक्षा भी चिंता का विषय
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत और बहरीन सहित 6 खाड़ी देशों में 1 करोड़ से भी ज्यादा भारतीय रहते हैं। इन देशों ने मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बाद हवाई रक्षा प्रणालियों या आपातकालीन अलर्ट को सक्रिय कर दिया है। युद्ध के बीच अलग-अलग घटनाओं में 8 भारतीय अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, जहाजों पर काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा भी बड़ा विषय है।
असर
भारत पर ये भी असर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ब्रेंट क्रूड 75 से 78 डॉलर के बीच बना रहा तो 2-4 हफ्तों में तेल कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, जिसका असर सीधे महंगाई बढ़ने के रूप में सामने आएगा। महंगा तेल खरीदने के लिए सरकार को ज्यादा डॉलर भी खर्च करने पड़ेंगे। इससे रुपये पर दबाव बढे़गा। तनाव कम होने या बढ़ने के हिसाब से शेयर बाजार भी प्रतिक्रिया देगा।