सरकार पहली बार निजी कंपनियों को देगी मिसाइल बनाने की अनुमति- रिपोर्ट
क्या है खबर?
भारत की रक्षा विनिर्माण नीति में एक बड़े बदलाव के तहत अब केंद्र सरकार निजी कंपनियों को भी मिसाइलों के निर्माण और विकास की अनुमति देने की तैयारी कर रही है। अब तक ये काम काफी हद तक सरकारी कंपनियां ही करती रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल DRDO द्वारा विकसित अत्याधुनिक अस्त्र मार्क-2 मिसाइल का उत्पादन पहली बार निजी क्षेत्र को सौंपा जाएगा। सरकार जल्द ही इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करेगी।
रिपोर्ट
प्रलय मिसाइलों के निर्माण में भी शामिल होंगी निजी कंपनियां- रिपोर्ट
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्रालय जल्द ही निजी क्षेत्र की कंपनियों और निगमों जैसे आईकॉम, अडाणी, भारत फोर्स, टाटा समूह और महिंद्रा जैसे समूहों से 180 से 200 किलोमीटर रेंज वाली अस्त्र मार्क 2 मिसाइल के निर्माण के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करने हेतु एक अनुरोध जारी करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, अस्त्र मिसाइल के बाद अगले चरण में 500 किलोमीटर मारक क्षमता वाली प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल के उत्पादन में भी निजी कंपनियों को शामिल किया जा सकता है।
वजह
सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी स्वामित्व वाली भारत डायनेमिक्स लिमिटेड सशस्त्र बलों की बढ़ती मांग और मित्र देशों को मिसाइल निर्यात की जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ है। हाल ही में इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों को लेकर समझौता हुआ है। ऐसे में भारत घरेलू हथियार उत्पादन में तेजी लाकर रक्षा निर्यात को बढ़ाना चाहता है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद सरकार अपने मिसाइल और रॉकेट शस्त्रागार को तेजी से बढ़ाना चाहती है।
मिसाइल
क्या है अस्त्र मिसाइल की खासियत?
अस्त्र मार्क 2 मिसाइल की मारक क्षमता 180 से 200 किलोमीटर है और इसे DRDO ने विकसित किया है। इसे चीन की लंबी दूरी की PL-15E हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल का मुकाबला करने के लिए बनाया गया था। यह बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल रडार की पकड़ में आने से पहले ही लक्ष्य को निशाना बना सकती है। इस मिसाइल को तेजस मार्क 1-A, मिग-29, Su-30 Mki और राफेल मरीन लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा।
आंकड़े
अस्त्र मिसाइल से जुड़े आंकड़े जानिए
अस्त्र के पहले संस्करण (Mk-1) की रेंज 80 से 110 किलोमीटर है, जबकि Mk-2 की रेंज 180 से 200 किलोमीटर है। Mk-3 (गांडीव) की रेंज 350 किलोमीटर से भी ज्यादा है। यह आवाज की गति से लगभग 4.5 गुना अधिक तेजी से उड़ान भरने में सक्षम है और 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक के लक्ष्यों को भेद सकती है। इसमें एक्टिव रडार सीकर तकनीक है, जो अंतिम क्षणों में दुश्मन लड़ाकू विमानों को ट्रैक कर सटीक निशाना बनाती है।