#NewsBytesExplainer: हिमाचल में पर्यटन पर पाबंदी, सड़कों-परियोजनाओं के लिए सख्त नियम क्यों चाहता है सुप्रीम कोर्ट?
क्या है खबर?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में पारिस्थितिक और पर्यावरणीय मुद्दों से जुड़े एक मामले पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) ने राज्य के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए कई उपाय सुझाए। समिति ने खासतौर पर पर्यटन स्थलों की 'वहन क्षमता' और हाईवे और जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर कई सुझाव दिए हैं। आइए जानते हैं कोर्ट हिमाचल में विकास परियोजनाओं और पर्यटन पर पाबंदी क्यों चाहता है।
मामला
सबसे पहले मामला जानिए
दरअसल, हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रहे पारिस्थितिक नुकसान और पर्यावरण से जुड़ मुद्दों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई, 2025 को स्वतः संज्ञान लिया था।
कोर्ट ने 9 मुख्य क्षेत्रों की पहचान की, जिनमें जोनिंग, वन और वृक्ष आवरण, प्रतिपूरक वनीकरण, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, सड़क बुनियादी ढांचा, जलविद्युत परियोजनाएं, खनन और पर्यटन शामिल थे।
जुलाई 2026 में कोर्ट ने CEC को इन क्षेत्रों की व्यापक जांच करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
जानकारी
क्या है CEC?
CEC एक वैधानिक निकाय है, जिसका गठन 2002 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के आधार पर किया गया था। यह पर्यावरण और वन मामलों से जुड़ी याचिकाओं पर कोर्ट को सलाह देने और उसके आदेशों के पालन की निगरानी में मदद करती है।
पर्यटन
CEC ने पर्यटन को लेकर क्या सिफारिशें कीं?
CEC के अनुसार, पिछले 10 सालों में हिमाचल में पर्यटकों की संख्या और होटलों में काफी वृद्धि हुई है।
पैनल ने प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए तुरंत वहन क्षमता अध्ययन कराने और आवश्यकतानुसार अस्थायी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है।
साथ ही, वैज्ञानिक आकलन के आधार पर जिला-वार और पर्यटन स्थल के हिसाब से पर्यटकों, वाहनों और ठहरने की जगहों की सीमा तय करने को कहा है। इसे समय-समय पर अपडेट कर सार्वजनिक करने की भी बात कही गई है।
पर्यटन में बढ़ोतरी
हिमाचल में कैसे बढ़ रहा है पर्यटन?
हिमाचल में 2016 से 2026 के बीच पंजीकृत होटलों की संख्या 90.8 प्रतिशत बढ़कर 2,784 से 5,311 हो गई है।
वहीं, होमस्टे की संख्या में 669.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अब ये 876 से बढ़कर 6,743 हो गए हैं।
इसी तरह होटलों की संख्या में लगभग 229 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब राज्य में 12,054 पंजीकृत होटल हैं।
CEC ने कहा कि पर्यटन में बढ़ोतरी अब पारंपरिक हिल स्टेशनों से बढ़कर संवेदनशील पहाड़ी इलाकों तक पहुंच रहा है।
सड़क
सड़क परियोजनाओं में पर्यावरण मंजूरी में छूट की समीक्षा की सलाह
CEC ने हिमालयी क्षेत्रों में सड़क निर्माण से पर्यावरण पर होने वाले असर को लेकर व्यापक चिंता जताई है।
CEC ने पहाड़ों की कटाई, खुदाई, मलबे, ढलानों के अस्थिर होने और सड़क निर्माण के कारण भूस्खलन का खतरा बढ़ने जैसी चिंताओं को उजागर किया।
CEC ने पर्यावरण मंत्रालय को सलाह दी कि वह 2013 में पहाड़ी सड़कों की नई परियोजनाओं और 2 या उससे अधिक लेन वाली विस्तार परियोजनाओं को दी गई 'पर्यावरण मंजूरी' से छूट की समीक्षा करे।
जलविद्युत परियोजनाएं
जलविद्युत परियोजनाएं चिंता का सबसे बड़ा विषय
CEC ने कहा कि ज्यादा जलविद्युत परियोजनाएं पर्यावरण पर सामूहिक दबाव डालती हैं। रिपोर्ट में पर्यावरण प्रवाह, कैचमेंट क्षेत्र के खराब होने, मलबे के निपटान, सुरंग निर्माण, वन भूमि के डायवर्जन और आपदा जोखिमों से जुड़ी चिंताओं को रेखांकित किया गया है।
CEC ने नदी-बेसिन के लिए आपदा तैयारी और जोखिम कम करने की योजनाएं बनाने का प्रस्ताव दिया। इनमें ग्लेशियर झील के फटने से आने वाली बाढ़ और कई तरह के खतरों से जुड़े जोखिमों को शामिल किया जाएगा।
परियोजनाएं के आंकड़े
राज्य में 1,000 से ज्यादा जलविद्युत परियोजनाएं
CEC के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में सतलुज, ब्यास, चिनाब, रावी और यमुना नदियों पर अलग-अलग चरणों में कुल 1,007 जलविद्युत परियोजनाओं पर काम जारी है या हो चुका है। इनकी कुल स्थापित क्षमता 22,957 मेगावाट है।
इनमें से 189 परियोजनाएं (कुल क्षमता 12,588 MW) चालू हो चुकी हैं, 53 परियोजनाएं (क्षमता 1,528 MW) निर्माणाधीन हैं, 526 परियोजनाएं (क्षमता 7,539 MW) मंजूरी या जांच के चरण में हैं, और 239 परियोजनाओं का आवंटन अभी होना बाकी है।