चुनाव आयोग को 6 राज्यों में SIR के दौरान मिले सिर्फ 1,600 विदेशी मतदाता- रिपोर्ट
क्या है खबर?
चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विवाद के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, आयोग ने पिछले साल बिहार से SIR की शुरूआत करने का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में शामिल अवैध विदेशी नागरिकों का पता लगाना बताया था, जबकि 6 राज्यों में हुए SIR के दौरान केवल 1,600 विदेशी मतदाता मिले हैं, जो इन राज्यों में कुल 9.86 करोड़ मतदाताओं का केवल 0.02 प्रतिशत है।
खुलासा
26 राज्यों के CEO से बात की, 11 ने जवाब दिए
रिपोर्ट के मुताबिक, अखबार ने उन 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से बात की, जहां SIR हो चुका था या मसौदा सूची आ चुकी थी।
इसमें 11 राज्यों के अधिकारियों ने जवाब दिया, 6 ने विदेशियों की संभावित गिनती बताई और 4 ने कहा कि वे ऐसे आंकड़े नहीं रखते।
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने भी कहा है कि उसने राज्यों से ऐसे आंकड़े नहीं मांगे और न इकट्ठा करने को कहा है।
पहचान
कर्नाटक में 716 विदेशी मतदाताओं की पहचान
रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक में 716 विदेशी नागरिकों की पहचान हुई, जिसमें बेंगलुरु उत्तर में 545 नेपाली नागरिक शामिल हैं।
दक्षिण कन्नड़ में 40, उत्तर कन्नड़ में 22 और उडुपी में 47 विदेशी नागरिकों का पता चला। ये सभी नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, आयरलैंड, नॉर्वे, फ्रांस से हैं।
इसमें कुछ पाकिस्तान और बांग्लादेश के भी पाए गए। इनके पास वोटर-ID थी, लेकिन जांच में स्कूल प्रमाणपत्र और संपत्ति रिकॉर्ड समेत दूसरे दस्तावेज नहीं दे पाए।
जांच
और किन-किन राज्यों में मिले विदेशी?
झारखंड में 3 की पहचान हुई, जो सभी अफगानिस्तान से थे। मेघालय में नेपाल के 2 पुरुषों की पहचान हुई, जिन्होंने भारतीय महिलाओं से शादी की थी।
केरलम में 500 के पास विदेशी नागरिकता थी, लेकिन वे मतदाता सूची में भी थे। गोवा में 419 विदेशी पासपोर्टधारकों का पता लगा।
पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और तेलंगाना के CEO ने कहा कि वे ऐसे आंकड़े नहीं रखते। ओडिशा ने कहा कि उसे विदेशी मिले थे, लेकिन उनका आंकड़ा तैयार नहीं किया।
कार्रवाई
6 राज्यों से हटाए गए 9 करोड़ से ज्यादा मतदाता
विदेशी नागरिकों का पता लगाने वाले राज्यों ने जमकर मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए हैं।
कर्नाटक ने अंतिम सूची से 90 लाख लोगों के नाम काट दिए। झारखंड में 40 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए।
मेघालय में अंतिम मतदाता सूची में 20.18 लाख नाम थे, जिसमें 1.65 लाख, केरल में 2.6 करोड़ नाम में से 8.97 लाख, गोवा में 10 लाख नाम थे, जिसमें 1.27 लाख और मिजोरम में 8.35 लाख नाम में 39,000 नाम हटा दिए।