सीमा पर क्यों बढ़ी पाकिस्तानी ड्रोनों की गतिविधियां, तस्करी या सैन्य उद्देश्य है वजह?
क्या है खबर?
'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान ने भारी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया था। अब करीब 8 महीने बाद फिर से भारतीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। 9 जनवरी से जम्मू-कश्मीर की सीमावर्ती इलाकों में कई पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए हैं। भारत की चेतावनी के बावजूद पाकिस्तान ने अभी तक इन्हें रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। आइए जानते हैं पाकिस्तान अचानक सीमा पार ड्रोन क्यों भेजने लगा है?
घटनाएं
9 जनवरी के बाद से 10-12 ड्रोन देखे गए
9 जनवरी से अब तक पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LoC) के आसपास के क्षेत्रों में कम से कम 10-12 ड्रोन भेजे हैं। 15 जनवरी को पुंछ और सांबा के रामगढ़ सेक्टर और 12 जनवरी को LoC और IB से लगे कई स्थानों पर संदिग्ध ड्रोन देखे गए। इसके बाद सुरक्षा बलों को ड्रोन विरोधी उपायों को सक्रिय किया। 13 जनवरी को राजौरी जिले में LoC के पास 2 बार संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए थे।
हथियार
क्या हथियारों की तस्करी कर रहे हैं ड्रोन?
शक है कि 9 जनवरी को सांबा जिले में पाकिस्तान से आए एक ड्रोन ने 2 पिस्तौल, 3 मैगजीन, 16 गोलियां और एक ग्रेनेड गिराया था। सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान के दौरान इ्न्हें बरामद कर लिया था। गणतंत्र दिवस को लेकर पहले से ही सुरक्षाबल अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी एसपी वैद ने कहा कि पाकिस्तान ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थ पहुंचाने की कोशिश कर रहा होगा।
वजह
क्यों बढ़ी पाकिस्तानी ड्रोनों की सक्रियता?
इंडिया टुडे ने जानकारों के हवाले से कहा कि पाकिस्तान द्वारा ड्रोन गतिविधियों में अचानक आई तेजी का मुख्य उद्देश्य भारतीय रक्षा प्रणालियों की कमजोरियों का पता लगाना है। भू-राजनीतिक विशेषज्ञ सुमित राज ने लिखा, 'पाकिस्तान 'पहचान अभियान' के लिए ड्रोन भेज रहा है। ये भारत की प्रतिक्रिया का जायजा लेने के लिए है। पाकिस्तान पता लगा रहा है कि भारत ने कौनसा रडार सिस्टम सक्रिय किया है और किन क्षेत्रों में भारतीय सेना की गतिविधि बढ़ रही है।'
हथियार
बिना हथियार के केवल हल्के ड्रोन भेज रहा पाकिस्तान
'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान ने आत्मघाती ड्रोन का इस्तेमाल किया था। ये ड्रोन लक्ष्य से टकराकर उसे नष्ट करते हैं। हालांकि, फिलहाल जो ड्रोन देखे जा रहा हैं, वे आत्मघाती नहीं हैं। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के मुताबिक, ये छोटे और टोही मिशनों में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन हैं। उन्होंने कहा कि देखे गए ड्रोन बहुत छोटे थे, उनकी लाइटें जल रही थीं और वे बहुत ज्यादा ऊंचाई पर नहीं उड़ रहे थे।
रिपोर्ट
लश्कर और खालिस्तानी संगठनों के पास आए हवाई उपकरण- रिपोर्ट
हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा गया था कि लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और खालिस्तानी चरमपंथी समूहों समेत कई आतंकवादी संगठनों ने ड्रोन, पैराग्लाइडर और इससे जुड़े उपकरण हासिल कर लिए हैं। एक अधिकारी ने कहा था कि रिमोट से चलने वाले वाहन (RPV), पैराग्लाइडर, हैंग-ग्लाइडर और इसी तरह के उपकरणों जैसे हवाई प्लेटफार्मों से बढ़ते खतरे का विश्लेषण किया जा रहा है। रिपोर्ट में हमास के हमले का भी जिक्र है, जब लड़ाकों ने मोटरयुक्त पैराग्लाइडर का इस्तेमाल किया था।