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आयतुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार में आमंत्रित किए गए प्रधानमंत्री, भारत के सामने क्या हैं दुविधाएं?
आयतुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को न्योता मिला है

आयतुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार में आमंत्रित किए गए प्रधानमंत्री, भारत के सामने क्या हैं दुविधाएं?

लेखन आबिद खान
Jun 25, 2026
06:04 pm

क्या है खबर?

अगले महीने ईरान के दिवगंत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई का अंतिम संस्कार किया जाना है। इजरायली-अमेरिकी हमले में उनका निधन हो गया था। अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किया है। इस न्यौते ने जहां एक बार फिर भारत-ईरान की नजदीकी की पुष्टि की है, वहीं भारत के सामने एक कूटनीतिक चुनौती भी खड़ी कर दी है। आइए मामला समझते हैं।

फैसला

अभी नहीं हुई प्रधानमंत्री के ईरान जाने की पुष्टि

भारत ने अभी तक प्रधानमंत्री के ईरान जाने की पुष्टि नहीं की है। अभी ये भी तय नहीं है कि प्रधानमंत्री की जगह कोई मंत्री या प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल होगा। ऊर्जा, व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों के क्षेत्र में भारत के ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। साथ ही अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के साथ भी भारत के रणनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं। इसी वजह से भारत विचार विमर्श के बाद कोई फैसला लेगा।

प्रतिक्रिया

खामेनेई के निधन के वक्त भी भारत ने साधी थी चुप्पी

अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ सैन्य टकराव के पहले ही दिन खामेनेई मारे गए थे। इसके बाद शुरू में भारत ने चुप्पी साधे रखी, जिस पर कई सवाल भी उठे। विपक्ष ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का हवाला देते हुए सरकार के रुख पर सवाल उठाए। इसके बाद नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में विदेश सचिव विक्रम मिसरी गए थे। वहां उन्होंने शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे।

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जरूरी

क्या कोई प्रतिनिधि भेजेगा भारत?

माना जा रहा है कि सरकार एक वरिष्ठ प्रतिनिधि को ईरान भेज सकती है। ये फैसला भारत के पूर्व दृष्टिकोण के अनुरूप होगा। साथ ही बाहरी दबावों के बावजूद ईरान के साथ संबंध बनाए रखने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करेगा। खामेनेई दुनियाभर के शिया मुसलमानों के प्रमुख भी थे। ईरान के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा शिया मुसलमान भारत में रहते हैं। इसके चलते अंतिम संस्कार में भारत की मौजूदगी और अहम हो जाती है।

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विशेषज्ञ

क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?

भारतीय सेना के पूर्व सैनिक और लेखक प्रवीण साहनी ने कहा, "ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति या अनुपस्थिति भारत की विदेश नीति की निर्णायक परीक्षा होगी, जिस पर विश्व के नेता नजर रखेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि मोदी इसमें शामिल नहीं होंगे। अगर मैं गलत साबित होता हूं तो मुझे खुशी होगी।" विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के ईरान जाने की संभावना कम है।

ईरान

भारत के लिए क्यों अहम है ईरान?

भारत ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह परियोजना पर काम कर रहा है। यह पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप तक भारत की पहुंच के लिए जरूरी है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान की स्थिति से वहां होने वाले घटनाक्रमों का भारत के ऊर्जा आयात पर सीधा प्रभाव पड़ता है। हाल ही में इसका असर देखने को मिला था। इसके अलावा दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं।

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