#NewsBytesExplainer: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में ऐसा क्या है, जो सड़कों पर उतरे किसान?
क्या है खबर?
देशभर के किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले 12 फरवरी को भारत बंद और हड़ताल का आह्वान किया है। ये कदम हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के विरोध में बुलाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किसानों के हित में नहीं है और इससे खेती, डेयरी और ग्रामीण आजीविका को नुकसान होगा। आइए समझौते के बारे में जानते हैं।
चिंताएं
क्यों चिंतित हैं किसान?
समझौते के अनुसार, भारत अमेरिका की औद्योगिक वस्तुओं और कई कृषि उत्पादों पर शुल्क खत्म या काफी कम करेगा। इसमें जानवरों के चारे के तौर पर इस्तेमाल होने वाला ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन (DDGs), लाल सोरघम (पशु चारा), ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं। पहले इन पर 30-150 प्रतिशत तक टैरिफ लगता था। किसानों का कहना है कि ये सस्ते उत्पाद भारतीय बाजार में बाढ़ ला देंगे, जिससे छोटे किसान बर्बाद हो जाएंगे।
उत्पाद
इन अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भी खुला बाजार
किसान की कुछ और चिंताएं भी हैं। SKM की राष्ट्रीय समन्वय समिति के सदस्य डॉक्टर दर्शन पाल ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "पहले मांस और जानवरों के बाय-प्रोडक्ट्स खाने वाले जानवरों के दूध पर लगी रोक सुरक्षा के तौर पर काम करती थी। अब इन सुरक्षाओं को कमजोर किया जा रहा है, जिससे भारत के डेयरी क्षेत्र के लिए खतरा पैदा हो रहा है, जो लाखों ग्रामीण परिवारों का समर्थन करता है।"
पॉल्ट्री
पॉल्ट्री क्षेत्र को लेकर भी चिंताएं
किसानों का कहुना है कि DDG पशु चारे के रूप में आएगा, जो पोल्ट्री और डेयरी को सस्ता चारा देगा लेकिन भारत के सोयाबीन उगाने वाले किसानों को नुकसान पहुंचाएगा। DDG जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) मक्के से मिलता है, जिसके प्रवेश पर भारत ने अब तक रोक लगा रखी थी। किसानों का मानना है कि इससे GM उत्पादों के आयात का रास्ता खुल गया है, जिससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति, बायोडायवर्सिटी और घरेलू बीज प्रणाली को नुकसान हो सकता है।
अन्य मुद्दे
सेब, नारियल और सूखे मेवे का बाजार भी होगा प्रभावित
अमेरिकी गेहूं के साथ सोयाबीन तेल, इथेनॉल, सेब, अनानास और नारियल जैसे फल और काजू जैसे सूखे मेवों के आयात से किसानों पर असर पड़ेगा। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों के किसान प्रभावित होंगे। कृषि नीति विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने कहा, "अगर सेब पर आयात शुल्क शून्य हुआ, तो ये कटौती सीधे तौर पर प्राइस प्रोटेक्शन को कमजोर करेगी और सस्ते आयात में बढ़ोतरी होगी, जिससे स्थानीय बाजार में घरेलू उपज के साथ मुकाबला करना पड़ेगा।"
विशेषज्ञ
क्या कह रहे हैं जानकार?
विशेषज्ञ इस समझौते को न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ (EU) के साथ हुए समझौते की तुलना में लचीला मानते हैं, जिसमें कृषि क्षेत्र को बाहर रखने का वादा टूट रहा है। शर्मा ने कहा, "भारत-न्यूजीलैंड समझौते के तहत, भारत सेब पर कोटा आधारित ड्यूटी में छूट देने के लिए सहमत हुआ है। इसी तरह भारत-EU में हुए समझौते में सेब को सालाना कोटे के तहत 20 प्रतिशत की रियायती ड्यूटी पर भारत में आने दिया जाएगा।"
सरकार
सरकार का क्या कहना है?
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, "किसानों और डेयरी क्षेत्र के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। दूध, चीज, मक्खन, घी जैसे उत्पादों के साथ गेहूं, चावल, मक्का, मोटा अनाज जैसे मुख्य उत्पादों को रियायत से बाहर रखा गया है। कई सब्जियां, फ्रोजन और संरक्षित खाद्य पदार्थ, काली मिर्च, जीरा, हल्दी, अदरक, धनिया और सरसों जैसे मसालों को भी सुरक्षित रखा गया है। आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य की अनुमति नहीं होगी।"