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भारत-EU व्यापार समझौते से कौन-कौन से सेक्टर को बड़ा फायदा संभव?
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है

भारत-EU व्यापार समझौते से कौन-कौन से सेक्टर को बड़ा फायदा संभव?

Jan 27, 2026
03:07 pm

क्या है खबर?

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आज एक बड़ा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हुआ है। शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि इस समझौते का असर आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार पर बहुत अच्छा दिख सकता है। इस खबर के बाद टेक्सटाइल से जुड़े KPR मिल, वेलस्पन लिविंग और नितिन स्पिनर्स जैसे शेयरों में तेजी देखी गई। निवेशकों को उम्मीद है कि इस डील से भारत के निर्यात और कंपनियों की कमाई दोनों में सुधार आएगा।

टेक्सटाइल

टेक्सटाइल सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा

EU को भारत के कुल निर्यात का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक FTA लागू होने से टेक्सटाइल सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है। अगर यूरोप में भारतीय कपड़ों पर टैरिफ शून्य होता है, तो भारतीय कंपनियां बांग्लादेश और वियतनाम के बराबर प्रतिस्पर्धी बन जाएंगी। इससे निटवेअर, आउटरवियर और ट्राउजर जैसे प्रोडक्ट्स में भारत की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। अरविंद, वर्धमान टेक्सटाइल्स और KPR मिल्स पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

फार्मा

फार्मा कंपनियों के लिए खुलेंगे नए रास्ते

फार्मास्यूटिकल सेक्टर के लिए भी यह समझौता बहुत अहम माना जा रहा है। अभी EU में भारतीय दवाओं की हिस्सेदारी कम है, लेकिन ग्रोथ की बड़ी संभावना है। डील के बाद दवाओं की मंजूरी प्रक्रिया तेज और सस्ती हो सकती है। इससे जेनेरिक और बायोसिमिलर दवाओं का निर्यात बढ़ेगा। बायोकॉन, डॉ रेड्डीज, ल्यूपिन, ऑरोबिंदो और सन फार्मा जैसी कंपनियों को यूरोपीय बाजार में आसानी से एंट्री मिलने की उम्मीद है।

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केमिकल

केमिकल सेक्टर में निर्यात बढ़ने की संभावना

केमिकल सेक्टर में भी भारत-EU FTA से सकारात्मक असर दिख सकता है। भारत अभी EU को केमिकल्स का बड़ा निर्यातक है। अगर टैरिफ कम होते हैं, तो भारतीय कंपनियों का निर्यात और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं। इसके साथ ही, यूरोपीय कंपनियों से सब-कॉन्ट्रैक्ट और टोल मैन्युफैक्चरिंग के मौके भी बढ़ेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ऑपरेटिंग मार्जिन में 100 से 400 बेसिस प्वाइंट तक सुधार हो सकता है।

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अन्य

किन बातों पर अब भी रहेगी नजर?

बाजार इस डील को सकारात्मक मान रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ और फैक्टर भी जरूरी हैं। अमेरिका-भारत ट्रेड डील, रुपये में स्थिरता और वैश्विक अनिश्चितता में कमी भी बाजार की दिशा तय करेगी। अगर ये हालात अनुकूल रहते हैं, तो भारत-EU FTA का पूरा फायदा दिख सकता है। कुल मिलाकर यह समझौता भारतीय निर्यात, निवेश और रोजगार के लिए लंबी अवधि में मजबूत आधार तैयार कर सकता है।

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