
देश में बढ़ रहे कुत्तों के काटने के मामले, जानें क्यों हिंसक हो रहे हैं कुत्ते
क्या है खबर?
देशभर में कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में रोजाना 100 से ज्यादा लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। इसे देखते हुए भाजपा ने शहर की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार से कुत्तों के लिए डॉग कॉम्प्लेक्स बनाने की मांग की है।
दिल्ली के अलावा बाकी राज्यों से भी इसी तरह के मामले रोजाना सामने आ रहे हैं।
आइए कुत्तों के हिंसक होने की वजह समझते हैं।
कहां
कहां-कहां बढ़ रहे हैं कुत्तों के काटने के मामले?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी महीने के शुरुआती 15 दिनों में गुजरात के सूरत में 477 लोगों को कुत्तों ने काटा। यहां हर रोज कुत्ते काटने के करीब 20 मामले सामने आ रहे हैं।
इसी तरह उत्तर प्रदेश के बरेली में पिछले एक साल में कुत्तों ने 21,000 से भी ज्यादा लोगों को काटा है। इनमें से 11 लोगों की मौत हो गई। इसी तरह के आंकड़ें देश के कई शहरों से सामने आ रहे हैं।
वजह
क्यों हिंसक हो रहे हैं कुत्ते?
इंडिया टुडे से बातचीत में विशेषज्ञों ने बताया, इसकी सबसे बड़ी वजह कुत्तों की बढ़ती तादाद है। एक स्वस्थ कुतिया एक साल में करीब 20 बच्चों को जन्म दे सकती है। इससे कुत्तों की आबादी बढ़ रही है, लेकिन उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाना नहीं मिल रहा।
एक कुत्ते को दिनभर में भूख मिटाने के लिए 5-6 रोटियों की जरूरत होती है, लेकिन आबादी बढ़ने की वजह से उन्हें पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा और वे हिंसक हो रहे हैं।
हादसे
वाहन हादसों में कुत्तों के बच्चों की मौत भी वजह
कुत्ते अपने बच्चों की देखभाल को लेकर बेहद आक्रामक और संवेदनशील होते हैं। अक्सर सड़क दुर्घटनाओं में कुत्ते के बच्चों की मौत हो जाती है। इस वजह से कुत्ते हिंसक हो रहे हैं।
इसके साथ ही वो वाहनों को अपना दुश्मन मानने लगते हैं और उनके पीछे दौड़ लगाने लगते हैं।
कुत्तों के पीछे दौड़ने की वजह से दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ जाता है और वे हादसे का शिकार हो जाते हैं।
व्यव्हार
आक्रामक व्यवहार भी है वजह
आमतौर पर सभी आवारा कुत्ते आक्रामक नहीं होते और अपने आसपास किसी इंसान को परेशान नहीं करते, लेकिन एक आक्रामक कुत्ता पूरे झुंड को आक्रामक बना सकता है।
इसी कारण किसी भी कुत्ते में हिंसक होने के थोड़े भी लक्षण दिखाई दें तो सबसे पहले इसकी सूचना नगर निगम या जिम्मेदार संस्था को देनी चाहिए। ऐसे कुत्ते को झुंड से अलग कर शेल्टर होम में देखरेख के लिए भेजा जाना चाहिए।
वफादारी
वफादारी भी है वजह
अगर आप कुत्तों को रोजाना खाना खिला रहे हैं तो वे आपके प्रति रक्षात्मक रवैया अपनाने लगते हैं। ऐसे में अगर कुत्तों का कोई दूसरा समूह या कोई व्यक्ति आपके घर के आसपास दिखे तो कुत्ते उसे खतरे की तरह देखते हैं।
ये कुत्तों के स्वभाव में होता है कि वे खाने खिलाने वाले की किसी भी कीमत पर रक्षा करते हैं। इस वजह से अगर कोई अनजान व्यक्ति आपके घर के आसपास दिखा तो कुत्ते हिंसक हो सकते हैं।
जिम्मेदारी
आवारा कुत्तों की देखभाल के लिए कौन है जिम्मेदार?
2001 में आए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के मुताबिक, आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण की जिम्मेदारी नागरिक संस्थाओं की है।
इसके लिए नागरिक संस्थाएं नगर निगम या नगर पालिका के साथ मिलकर अभियान चलाती हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के चलते इस काम को निरंतरता के साथ बड़े पैमाने पर नहीं किया जाता है।
इस वजह से आवारा कुत्तों की आबादी भी बढ़ रही है और वे हिंसक हो रहे हैं।