#NewsBytesExplainer: ईरानी तेल पर अमेरिकी छूट से भारत को कितना फायदा, क्या हैं चुनौतियां?
क्या है खबर?
भारत के लिए एक संभावित बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका ने ईरान के पेट्रोलियम उत्पादों पर प्रतिबंधों में 60 दिन की छूट की घोषणा की है। भारत पहले अपनी कुल जरूरत के तेल का एक बड़ा हिस्सा ईरान से खरीदता था। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ये खरीद लगभग बंद हो गई थी। अब छूट मिलने से भारत को फायदा मिलने की उम्मीद है। आइए इस कदम के फायदे समझते हैं।
छूट
क्या है अमेरिका का छूट से जुड़ा आदेश?
अमेरिका के वित्त विभाग ने 22 जून को आदेश जारी कर कहा कि 21 अगस्त तक ईरान के पेट्रोलियम उत्पादों के प्रोडक्शन, डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी जाती है। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का भी वादा किया है। अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के समझौते (MoU) के तहत ईरान को यह छूट मिली है। ईरान ने इसके बदले होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को प्रभावित नहीं करने का वादा किया है।
भारत
ईरान ने भारतीय रिफाइनरियों से किया संपर्क- रिपोर्ट
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। अमेरिका के ईरान पर प्रतिबंध लगाने से पहले तक भारत ईरान का बड़ा तेल खरीदार था। 2019 में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद भारत ने तेहरान से तेल खरीदारी कम की थी। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (NIOC) ने इंडियन रिफाइनर से संपर्क करना शुरू कर दिया है।
बयान
रिपोर्ट में दावा- संपर्क में भारतीय और ईरानी कंपनियां
भारत के रिफाइनिंग क्षेत्र से जुड़े सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि कंपनियां ईरानी पक्ष के संपर्क में हैं और छूट के तहत ईरानी तेल खरीद की तकनीकी और वाणिज्यिक संभावनाओं पर भी बातचीत चल रही है। यह भी जांच की जा रही है कि ईरानी तेल भारतीय रिफाइनरियों के साथ तकनीकी तौर पर कितना सुगम है और क्या इसे खरीदना लॉजिस्टिकली भी फायदे का सौदा है या नहीं।
संशय
विशेषज्ञों ने कहा- बड़े पैमाने पर खरीद बढ़ने की संभावना कम
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत फिलहाल बड़े पैमाने पर ईरानी तेल की खरीद शायद ही करे। केप्लर से जुड़े सुमित रिटोलिया ने कहा, "रिफाइनर 3 बातों पर ध्यान देंगे- प्रतिबंधों में राहत का टिकाऊपन, कीमत और छूट और भुगतान, बीमे और शिपिंग की उपलब्धता। भुगतान सबसे बड़ी रुकावट बाधा है।" एनर्जी इंटेलिजेंस ने लिखा, "छूट से भारत को सीधे ज्यादा तेल नहीं मिलेगा। इसके मुख्य कारण हैं दूसरे खरीदारों से प्रतिस्पर्धा और भुगतान के साथ जुड़े प्रतिबंध जोखिम।"
प्रतिबंध
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
अबू धाबी की ऊर्जा विशेषज्ञ नतालिया कटोना ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "ईरानी बैंकों पर अभी भी भारी प्रतिबंध है, इसलिए खरीदारों को व्यापार शुरू करने से पहले भुगतान, दस्तावेज और सेटलमेंट की औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। मुझे लगता है कि खरीदारों की संख्या अभी भी काफी सीमित होगी। अब तक जिन चीनी रिफाइनर ने ईरानी तेल खरीदा है, उन्होंने युआन में भुगतान किया है। यह ऐसा तरीका नहीं है जिसे भारतीय रिफाइनर आसानी से अपना सकें।"
अवधि
केवल 60 दिन की छूट भी सबसे बड़ी बाधा
अमेरिका ने प्रतिबंधों में केवल 60 दिन की छूट दी है। रिटोलिया ने कहा, "अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए ज्यादातर रिफाइनर पहले से ही आपूर्ति सुरक्षित करने में सक्रिय रहे हैं। रिफाइनरी की प्लानिंग साइकिल 2-3 महीने पहले चलती है। इसका मतलब है कि कई रिफाइनर ने अगस्त तक के लिए निर्यात की व्यवस्था पहले ही कर ली है। वेनेजुएला के कच्चे तेल की हिस्सेदारी बढ़ रही है। रूसी कच्चे तेल की उपलब्धता अच्छी बनी हुई है।"
खरीदी
कभी भारत का प्रमुख तेल आयातक हुआ करता था ईरान
2009-10 में भारत ने ईरान से 2.21 करोड़ टन कच्चा तेल आयात किया था, जो कुल तेल आयात का 14.4 प्रतिशत था। हालांकि, जैसे-जैसे ईरान पर प्रतिबंध कड़े होते गए, आयात कम होता गया। इस बीच 2015 में हुई परमाणु समझौते के बाद फिर आयात बढ़ा। 2016-17 में ईरान भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात स्त्रोत बन गया। ट्रंप के पहले कार्यकाल में प्रतिबंध के बाद 2019 के बाद से भारत ने ईरान से तेल खरीद बंद कर दी।