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अमेरिकी छूट के बाद भारत ने बनाई ईरान से तेल खरीदने की योजना, क्या मिल पाएगा?
अमेरिकी छूट के बाद भारत ने बनाई ईरान से तेल खरीदने की योजना

अमेरिकी छूट के बाद भारत ने बनाई ईरान से तेल खरीदने की योजना, क्या मिल पाएगा?

Mar 21, 2026
01:45 pm

क्या है खबर?

मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंधों को 30 दिनों के लिए अस्थायी रूप से हटा दिया है। इसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने ईरानी कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू करने की योजना बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि, इसके लिए पहले सरकार की मंजूरी की आवश्यता है। हालांकि, इससे पहले ही ईरान ने किसी भी देश को कच्चा तेज बेचने से इनकार कर दिया है। आइए पूरा मामला जानते हैं।

छूट

अमेरिका ने 30 दिन के लिए अस्थायी रूप से हटाया प्रतिबंध

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को समुद्र में फंसे ईरानी तेल की बिक्री की 30 दिन के लिए अनुमति दे दी। इससे अमेरिका की नीति में बदलाव आया। इसका उद्देश्य कच्चे तेल की कीमतों को कम करना है, जो पूरे सप्ताह 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही है। दरअसल, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही को बंद कर रहा है, जिससे होकर दुनिया के 20-25 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होता है।

योजना

भारतीय रिफाइनरियों ने बनाई ईरानी तेल खरीदने की योजना

अमेरिका द्वारा इसी तरह की छूट दिए जाने के बाद भारत पहले ही जहाजों पर लदा रूसी तेल को खरीद रहा है और अब भारतीय रिफाइनरियों ने ईरानी तेल खरीदने की योजना भी बनाना शुरू कर दिया है। रॉयटर्स के अनुसार, तीन कंपनियां ईरानी तेल खरीदने की योजना बना रही हैं और सरकार के निर्देशों का इंतजार कर रही हैं। इधर, सरकार ने भुगतान तंत्र जैसे पहलुओं पर ट्रंप प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है। उसके बाद खरीद पर निर्णय होगा।

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जानकारी

भारत अपनी जरूरत के 90 प्रतिशत तेल का करता है आयात

बता दें कि भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसके कच्चे तेल के आयात का लगभग 60 प्रतिशत खाड़ी देशों से आता है। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियां अमेरिकी छूट का अधिक से अधिक फायदा उठाना चाहती है।

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खरीदार

भारत 2018 से पहले था ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार

ऐतिहासिक रूप से साल 2018 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने से पहले भारत ईरानी कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार था। उस समय ईरानी कच्चे तेल का भारत की कुल खपत में लगभग 11.5 प्रतिशत हिस्सा था। हालांकि, प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरान से धीरे-धीरे तेल खरीद कम कर दी और रूस और अन्य खाड़ी देशों की ओर रुख किया। वर्तमान संकट के बावजूद, ईरान से तेल की आपूर्ति चीन को जारी है, जो इसका मुख्य खरीदार है।

फायदा

ईरानी तेल से भारत को होगा फायदा

बेसेंट ने कहा कि यह छूट विशेष रूप से भारत, जापान और मलेशिया जैसे एशियाई उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से दी गई है। हालांकि, इस छूट का सबसे ज्यादा फायदा भारत को होगा, क्योंकि ईरान से प्राप्त हल्के और भारी दोनों प्रकार के कच्चे तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त हैं। समुद्री खुफिया फर्म केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा, "भारतीय शोधक न्यूनतम परिचालन समायोजन के साथ ईरानी तेल को पुनः एकीकृत करने की क्षमता रखते हैं।"

रुख

ईरान ने अपनाया कड़ा रुख

हालांकि, ईरान ने अमेरिका का विरोध करके एक नया मोड़ ला दिया है, जिससे पहले से ही अस्थिर ऊर्जा बाजार में और अधिक घबराहट पैदा हो सकती है। मुंबई स्थित ईरान के वाणिज्य दूतावास ने कहा, "फिलहाल, ईरान के पास अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए न तो कच्चा तेल उपलब्ध है और न ही कोई अतिरिक्त भंडार। अमेरिकी वित्त मंत्री की टिप्पणियां खरीदारों को आश्वस्त करने और बाजार की स्थिति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से प्रतीत होती हैं।"

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