#NewsBytesExplainer: क्या है पैक्स सिलिका, इसमें शामिल होने से भारत को क्या फायदा होगा?
क्या है खबर?
भारत अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल हो गया है। दिल्ली में चल रही AI इम्पैक्ट समिट में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की मौजूदगी में इस घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। यह गठबंधन सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाय चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए बनाया गया है। आइए इस गठबंधन में शामिल होने से भारत को होने वाले फायदे समझते हैं।
पहल
सबसे पहले जानिए क्या है पैक्स सिलिका?
पैक्स सिलिका अमेरिकी नेतृत्व वाला रणनीतिक गठबंधन है, जिसे AI और सेमीकंडक्टर के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए शुरू किया गया है। पैक्स शब्द लैटिन भाषा के शांति शब्द से आया है। यहां ये सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्थिरता की परिकल्पना को दर्शाता है, वहीं सिलिका आधुनिक कंप्यूटर चिप्स और AI प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले खनिज के लिए है। अमेरिका ने दिसंबर, 2025 में पैक्स सिलिका की शुरूआत की थी।
वजह
क्यों बनाया गया पैक्स सिलिका?
दरअसल, कोविड-19 महामारी और हालिया वैश्विक उथल-पुथल के बाद दुनिया ने महसूस किया कि चिप्स और तकनीकी उपकरणों के लिए जरूरी खनिजों की सप्लाय कुछ चुनिंदा देशों के हाथ में है। अमेरिका समेत पश्चिमी देशों को लगा कि AI के युग में ये एकाधिकार भविष्य में उनके लिए चुनौतियां पेश कर सकता है। इसी वजह से पैक्स सिलिका बनाया गया। ये 20वीं सदी की तेल-इस्पात पर निर्भरता से महत्वपूर्ण खनिजों द्वारा संचालित अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव का प्रतीक भी है।
चीन
चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति
गठबंधन का एक प्रमुख लक्ष्य चीन पर खनिजों की निर्भरता कम करना है, जो फिलहाल दुर्लभ खनिजों के बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है। दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत दुर्लभ खनिजों की प्रोसेसिंग चीन में होती है। वैश्विक दुर्लभ खनन उत्पादन में चीन का योगदान 60 प्रतिशत और खास चुंबकीय तत्वों वाले दुर्लभ खनिज उत्पादन में 90 प्रतिशत तक है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा गया है कि गठबंधन चीन को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
भारत
भारत के लिए गठबंधन में शामिल होना कितना अहम है?
भारत को पैक्स सिलिका में अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां प्रतिभाओं का भंडार है और खनिज संसाधनों का पूरी तरह से दोहन नहीं हुआ है। इस पहल में शामिल होने से भारत की चीन पर निर्भरता कम हो सकती है और उन्नत खनिज प्रसंस्करण और चिप निर्माण में जापान और नीदरलैंड जैसे अग्रणी देशों के साथ साझेदारी को बढ़ावा मिल सकता है। यह भारत के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन और भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन के अनुरूप भी है।
फायदे
भारत को क्या फायदे होंगे?
ये गठबंधन दुनिया की महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं खासतौर पर AI, सेमीकंडक्टर और रणनीतिक खनिजों के भविष्य को आकार दे रहा है। इसमें शामिल होने से भारत का अमेरिका और अन्य उन्नत भागीदारों के साथ सहयोग बढ़ेगा। इंडिया AI मिशन और संप्रभु कंप्यूटिंग क्षमता जैसी पहलों के लिए पैक्स सिलिका में शामिल होने से विश्वसनीय चिप पारिस्थितिकी तंत्र तक भारत की पहुंच मजबूत होगी। भारत को समन्वित सोर्सिंग फ्रेमवर्क और विश्वसनीय खनिज साझेदारियों तक पहुंच प्राप्त होगी।
देश
गठबंधन में कौन-कौनसे देश शामिल हैं?
पैक्स सिलिका में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजरायल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यूनाइटेड किंगडम (UK) शामिल है। IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को बहुत फायदा होगा। भारत में 10 प्लांट पहले ही लग चुके हैं। बहुत जल्द पहला सेमीकंडक्टर प्लांट उत्पादन शुरू कर देगा। भारत में पूरा इकोसिस्टम बन रहा है। इससे भारत के युवाओं को फायदा होगा।"