#NewsBytesExplainer: अमेरिका ने ईरान के तेल पर से प्रतिबंध हटाए, क्या भारत को होगा फायदा?
क्या है खबर?
ईरान युद्ध का कच्चे तेल और LNG की कीमतों पर खासा असर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई है और भारत समेत कई देशों में ऊर्जा संकट सामने आ रहा है। स्थिति बिगड़ती देख अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध में 30 दिनों की छूट दी है। ये छूट केवल उसी तेल पर लागू होगी, जो पहले से समुद्र में है। आइए इसका भारत पर असर समझते हैं।
अमेरिका
छूट के बारे में अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्काट बेसेंट ने कहा कि इस अस्थायी उपाय से वैश्विक बाजारों में 14 करोड़ बैरल ईरान का तेल उपलब्ध हो सकेगा। बेसेंट ने लिखा, 'यह अस्थायी, अल्पकालिक अनुमति केवल उस तेल तक सीमित है जो पहले से ही रास्ते में है। नई खरीद या उत्पादन के लिए कोई छूट नहीं दी जा रही है।' यह छूट 20 मार्च तक जहाजों पर लादे गए ईरानी तेल पर लागू होगी और 19 अप्रैल को खत्म हो जाएगी।
ईरान
प्रतिबंधों से पहले भारी मात्रा में ईरानी तेल खरीदता था भारत
2018 में ईरान पर पाबंदियां लागू होने से पहले भारत के कुल तेल आयात में ईरान का बहुत बड़ा हिस्सा था। तब कुल तेल आयात में करीब 11 प्रतिशत हिस्सा ईरान से आता था। हालांकि, 2019 में यह आपूर्ति लगभग पूरी तरह बंद हो गई। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसका भी 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा इराक, सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों से आता है।
फायदा
भारत को क्या हो सकता है फायदा?
मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म कैप्लर के मुताबिक़, इस समय करीब 17 करोड़ बैरल ईरानी कच्चा तेल समुद्र में है। कैप्लर के सुमित रितोलिया ने BBC से कहा, "अगर पाबंदियों में ढील मिलती है, तो अतिरिक्त सप्लाई बाजार में आ सकती है। भारतीय रिफ़ाइनरियां इस तेल को फिर से अपने सिस्टम में लाने में सक्षम हैं और इसके लिए बहुत कम संरचनात्मक बदलाव की जरूरत होगी, क्योंकि उन्हें पहले से इसे प्रोसेस करने का अनुभव है।"
चुनौतियां
ये चुनौतियां भी हैं
बेसेंट ने ये नहीं बताया कि ये छूट किस तरह लागू की जाएगी। इस पर रिलोतिया ने कहा, "तेल सप्लाई आसान करने से जुड़ी बातों में कई चीजें शामिल हैं। जैसे पाबंदियों में राहत कितनी व्यापक और टिकाऊ होगी, कीमत तय करने का ढांचा क्या होगा और पेमेंट, बीमा और लॉजिस्टिक्स की क्या व्यवस्था होगी। जब तक इन व्यवस्थाओं को स्पष्ट या आसान नहीं किया जाता, तब तक सौदे जोखिम भरे बने रहेंगे।"
विकल्प
भारत के पास होर्मुज जितना सस्ता कोई विकल्प नहीं
समुद्री विशेषज्ञ कमोडोर रणजीत राय ने इंडिया टुडे से कहा, "भारत के पास होर्मुज जलडमरूमध्य का तत्काल कोई विकल्प नहीं है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 45 प्रतिशत खाड़ी देशों पर निर्भर करता है। रूस से आयात बढ़ाना, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल प्राप्त करना, या आपूर्ति मार्गों को बदलना विकल्प हैं, लेकिन इसमें लागत काफी ज्यादा होगी। खाड़ी देशों से मिलने वाली ऊर्जा सस्ती है। वैकल्पिक ऊर्जा महंगी होगी, खासकर परिवहन के मामले में।"
अन्य विकल्प
इस विकल्प पर भी विचार कर रहा भारत
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सऊदी अरब से तेल को जेद्दा से सड़क मार्ग के जरिए से ले जाकर फिर अदन की खाड़ी के रास्ते लाने पर विचार कर रहा है, हालांकि, इसकी व्यवहार्यता और लागत प्रमुख चिंताएं बनी हुई हैं। कमोडोर राय के अनुसार, भविष्य की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि स्थिति कैसे विकसित होती है और क्या ईरान फारस की खाड़ी से सुरक्षित मार्ग के लिए आश्वासन देता है।