बार काउंसिल अध्यक्ष के कार्यकाल पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, नीतिगत फैसले लेने पर कटौती
क्या है खबर?
देश में वकीलों की सर्वोच्च संस्था बार काउंसिल (BCI) की कार्यप्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की अगुवाई वाली परिषद अब कोई भी नीतिगत फैसले अकेले नहीं ले सकती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे सभी निर्णयों में भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सक्रिय भागीदारी और सहमति लेनी जरूरी होगी।
टिप्पणी
कोर्ट ने कहा- केवल रोजाना के फैसले ले सकेंगे मिश्रा
कोर्ट ने कहा, "आप (मनन मिश्रा) प्रोटेम चेयरमैन हैं, इसलिए सिर्फ दिन-प्रतिदिन का काम देखेंगे। नीतिगत मामलों में फैसला लेने से पहले आप भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को इसमें शामिल करेंगे।"
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा कि पहली नजर में उनका पद केवल प्रो टेम है, जो तब तक रहेगा जब तक कि BCI अपने पदाधिकारी नहीं चुन लेती।"
कार्यकाल
कोर्ट ने पूछा- 2 साल का कार्यकाल 5 साल कैसे बढ़ाया गया?
याचिकाकर्ताओं की वकील माधवी दीवान ने कहा, "मिश्रा को 2 मार्च, 2025 को अध्यक्ष चुना गया था। उनका कार्यकाल 17 अप्रैल, 2025 से 16 अप्रैल, 2030 को समाप्त होगा। 9 जनवरी, 2025 के एक प्रस्ताव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल 3 से बढ़ाकर 5 साल करने का प्रयास किया गया था, जबकि नियमों में केवल 2 साल का कार्यकाल निर्धारित है।"
इस पर पीठ ने कहा, "2 साल की अवधि निर्धारित होने के बावजूद ऐसा विस्तार कैसे संभव है।"
चुनाव
कोर्ट ने BCI अध्यक्ष चुनाव के लिए बताई टाइमलाइन
कोर्ट ने कहा, "BCI पुनर्गठन पर विचार राज्य बार काउंसिल चुनाव होने और प्रतिनिधियों के चुने जाने के बाद किया जाएगा। राज्यों के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध किया गया है कि वे 2 सप्ताह के भीतर बार काउंसिल में 2 महिला सदस्यों के मनोनयन की प्रक्रिया पूरी करें। इसके एक सप्ताह के भीतर बार काउंसिलों को अपनी नई संरचना अधिसूचित करनी होगी। इसके 3 सप्ताह भीतर बार काउंसिलों को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और BCI प्रतिनिधि का चुनाव करना होगा।"
विवाद
क्या है मामला?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में मिश्रा के BCI अध्यक्ष बने रहने और कार्यकाल 2030 तक बढ़ाने वाली अधिसूचना की वैधता को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की गई हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मिश्रा 2012 से लगातार इस पद पर काबिज हैं और अवैध तरीके से इसे संभाल रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं ने BCI द्वारा गठित पर्ल फर्स्ट नामक एक नए ट्रस्ट के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि मिश्रा और अन्य लोग आजीवन ट्रस्टी बने हुए हैं।
विवाद
लगातार विवादों में हैं मिश्रा
BCI अध्यक्ष मिश्रा हालिया समय में विवादों में रहे हैं।
पिछले महीने BCI ने CJI का विरोध करने पर नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) विश्वविद्यालय के छात्रों के पंजीयन पर रोक लगा दी थी। हालांकि, विरोध के बाद फैसला वापस लिया गया।
हाल ही में BCI के सह-अध्यक्ष ने मिश्रा पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। उन्होंने मिश्रा पर संदिग्ध नियुक्तियों और परिषद की मंजूरी के बिना फैसले लेने के भी आरोप लगाए थे।