बार काउंसिल अध्यक्ष पर 150 करोड़ की हेरफेर के आरोप, नियुक्तियों पर भी उठे सवाल
क्या है खबर?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा नए विवादों में घिरते जा रहे हैं। अब BCI के सह-अध्यक्ष वाईआर सदाशिव रेड्डी ने ही उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वरिष्ठ वकील रेड्डी ने मिश्रा पर वित्तीय अनियमितताओं, संदिग्ध नियुक्तियों और परिषद की मंजूरी के बिना फैसले लेने के आरोप लगाए हैं। रेड्डी ने मिश्रा के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि बार बेहतर का हकदार है।
हेरफेर
मिश्रा पर 150 करोड़ रुपये की हेरफेर का आरोप
रेड्डी ने इस संबंध में 22 अगस्त को एक पत्र लिखा था।
उन्होंने आरोप लगाया कि मिश्रा ने BCI को निष्क्रिय होने दिया और 17 सितंबर, 2020 को एक नया ट्रस्ट BCI ट्रस्ट पर्ल पंजीकृत किया गया।
पत्र के अनुसार, नए ट्रस्ट के सदस्यों का चयन मिश्रा ने खुद किया था। रेड्डी ने आगे कहा कि BCI फंड से 150 करोड़ रुपये ट्रस्ट में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
आरोप
रेड्डी का आरोप- विश्वविद्यालयों से ट्रस्ट में मांगा गया योगदान
रेड्डी ने आरोप लगाया कि BCI से अनुमोदन या नवीनीकरण चाहने वाले विधि कॉलेजों से ट्रस्ट में योगदान देने के लिए कहा गया। कथित तौर पर इसके लिए 25 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक मांगे गए।
उन्होंने कहा, "अगर यह आरोप सही हैं, तो यह अत्यंत गंभीर मामला होगा। कॉलेजों को मंजूरी देने या नवीनीकृत करने की BCI की शक्ति एक नियामक कार्य है, न कि धन जुटाने का साधन।"
बयान
रेड्डी बोले- BCI किसी की निजी संपत्ति नहीं
रेड्डी ने कहा कि वह मिश्रा को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं बल्कि BCI के निर्वाचित सदस्य और 3 दशकों से अधिक समय से इस पेशे के सदस्य के रूप में लिख रहे हैं।
उन्होंने कहा, "BCI किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है। चुप रहना देश के वकीलों द्वारा मुझ पर रखे गए भरोसे का उल्लंघन होगा।"
उन्होंने BCI और ट्रस्ट के खातों के ऑडिट की मांग की।
नियुक्ति
BCI में नियुक्तियों को लेकर भी आरोप
रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि BCI के कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा मिश्रा से व्यक्तिगत रूप से जुड़ा हुआ था, जिसमें उनके परिवार के सदस्य भी शामिल थे।
उन्होंने दावा किया कि नियुक्तियों को सही ठहराने के लिए परिषद के समक्ष विज्ञापनों, चयन समितियों या योग्यता सूचियों का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था।
उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का कार्यकाल केवल 2 साल के लिए होता है, लेकिन मिश्रा 2012 से पद पर बने हुए हैं।
इस्तीफा
मिश्रा बोले- 25 लाख वकीलों का प्रतिनिधि, नहीं दूंगा इस्तीफा
मिश्रा ने कहा, "क्या आप BCI जैसी संस्था का मजाक उड़ाना चाहते हैं? क्या आपको लगता है कि आप सोशल मीडिया पर फालतू पोस्ट डालकर BCI अध्यक्ष को इस्तीफा देने पर मजबूर कर सकते हैं, जो पूरे देश में 25 लाख वकीलों का प्रतिनिधित्व करते हैं? एक वकील कॉकरोच नहीं हो सकता। वकील एक सम्मानित वर्ग से होते हैं; वे बहुत ही समझदार लोग होते हैं।"