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रूस ने अमेरिका के खिलाफ गुप्त रूप से ईरान को सुपरसोनिक मिसाइलें बनाने में मदद की
पिछले साल मॉस्को में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई थी (फाइल तस्वीर)

रूस ने अमेरिका के खिलाफ गुप्त रूप से ईरान को सुपरसोनिक मिसाइलें बनाने में मदद की

लेखन गजेंद्र
Sep 02, 2026
11:10 am

क्या है खबर?

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में रूस ने भी गोपनीय तरीके से तेहरान की मदद की है। इसका खुलासा फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने 2023 से एक गुप्त कार्यक्रम के तहत ईरान के उन्नत सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के विकास में गुपचुप तरीके से समर्थन दिया है। इसका उद्देश्य तेहरान को पश्चिम एशिया में अमेरिकी विमानवाहक पोतों और अन्य युद्धपोतों को निशाना बनाने की क्षमता प्रदान करना था।

योजना

C430L कार्यक्रम के तहत बताई गई तकनीक

रिपोर्ट में बताया गया कि C430L नामक कार्यक्रम के जरिए रूस ने ईरान के साथ तकनीक साझा की थी, जिसमें रूस के कुछ सबसे अनुभवी मिसाइल विशेषज्ञ शामिल थे।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों का उद्देश्य ईरान को एक रैमजेट प्रणोदन प्रणाली विकसित करने में सहायता करना था, जो ध्वनि की गति से कई गुना अधिक गति से क्रूज मिसाइलों को शक्ति प्रदान करने में सक्षम हो।

ऐसी क्रूज मिसाइलों को रोकना वायु रक्षा प्रणालियों के लिए कठिन हो सकता है।

कार्यक्रम

क्या है C430L कार्यक्रम और रैमजेट तकनीक?

C430L कार्यक्रम 2023 में शुरू हुआ। इसमें रूस की सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट और मिसाइल निर्माता कंपनी एनपीओ माशिनोस्ट्रोयेनिया शामिल थीं।

लीक हुए रूसी पत्राचार, यात्रा रिकॉर्ड और सैन्य पेटेंट के विश्लेषण पर आधारित फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान को सहयोग की तैयारी 2023 से पहले से चल रही थी।

इसके तहत, रैमजेट तकनीक एक वायु-चालित प्रेषण प्रणाली है जो मिसाइल को ध्वनि की गति से कई गुना अधिक बनाए रखने में सक्षम बनाती है।

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जानकारी

ईरान कई वर्षों से इस तकनीक पर काम कर रहा था

ईरान वर्षों से इस तकनीक पर जुटा है। ईरानी मीडिया ने 2023 में रैमजेट-प्रोटोटाइप परीक्षणों की रिपोर्ट दी थी, जबकि अयातुल्ला अली खामेनेई 2019 में इससे जुड़े मिसाइल विकास स्थल का निरीक्षण कर चुके थे। रूस तकनीकी चुनौतियों से उबरने में मदद कर रहा था।

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लाभ

क्या अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बना सकती है ये तकनीक?

ईरान ने रूस की मदद से यह कार्यक्रम इसलिए शुरू किया ताकि आधुनिक हथियारों से मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों को निशाना बनाया जा सके।

रिपोर्टों में सैन्य और मिसाइल विशेषज्ञों ने कहा कि इस तकनीक का उपयोग संभवतः जहाज-रोधी और जमीनी-हमला क्रूज मिसाइलों में किया जाएगा।

तकनीक से बनी मिसाइल की सुपरसोनिक गति और निम्न-स्तरीय उड़ान के संयोजन से पश्चिमी वायुरक्षा प्रणालियों को मिसाइलों का पता लगाने और उसपर पलटवार करने के लिए कम समय मिल सकता है।

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