OBC क्रीमीलेयर सिर्फ माता-पिता के वेतन से तय नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका ठुकराई
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर आरक्षण के मामले में केंद्र सरकार की संशोधन याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने दोहराया कि क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता की वेतन से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि क्रीमी लेयर से बाहर रखने का फैसला माता-पिता की आय के बजाय उनकी सेवा संबंधी स्थिति और पद के आधार पर किया जाएगा। यही फैसला सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मार्च में सुनाया था।
समय
कोर्ट ने केंद्र को 2 साल का समय देने से भी इनकार किया
कोर्ट ने फैसला लागू करने के लिए 2 साल का समय मांगने की केंद्र की मांग को भी खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा, "सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 का परिणाम 6 मार्च को घोषित हुआ था, लेकिन सेवाओं का आवंटन अभी नहीं हुआ है। इसलिए फैसले को लागू करने में देरी का कोई ठोस या उचित कारण नहीं है। CSE 2025 में चुने गए OBC उम्मीदवारों की सेवाओं के आवंटन पर 'क्रीमी लेयर' के सिद्धांत की व्याख्या लागू होगी।"
मांग
क्या थी केंद्र सरकार की मांग?
सरकार की मांग थी कि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को 'रेट्रोस्पेक्टिव' यानी कि पिछली तारीख से लागू होने के बजाय 'प्रोस्पेक्टिव' या भविष्य की तारीख से लागू करने का आदेश दे।
सरकार का तर्क था कि यदि 11 मार्च के फैसले को पिछली तारीखों से लागू किया गया, तो साल 2012 से अब तक हो चुकी नियुक्तियों और वरिष्ठता सूची को बदलना पड़ेगा। इससे उन कर्मचारियों पर भी असर पड़ेगा, जो इस मामले में पक्षकार भी नहीं हैं।
पिछला फैसला
क्या था मार्च में दिया फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को केंद्र सरकार बनाम रोहित नाथन मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। तब जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा था कि OBC क्रीमीलेयर का फैसला केवल माता-पिता के वेतन के आधार पर नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा था कि माता-पिता के पद, सेवा की श्रेणी और 8 सितंबर 1993 के सरकारी आदेश में दिए गए नियमों को भी देखना होगा।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
क्रीमी लेयर में OBC के ज्यादा अमीर और सामाजिक रूप से आगे रहने वाले सदस्य आते हैं, जिन्हें सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण नहीं मिलता है।
इंद्रा साहनी मामले के बाद ये नियम बना, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण को सही ठहराया था, लेकिन अमीर तबकों को इससे बाहर रखा था।
फिलहाल सालाना 8 लाख रुपये से ज्यादा कमाने वाले OBC परिवार को क्रीमी लेयर का हिस्सा माना जाता है और उन्हें आरक्षण नहीं मिलता।