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राम मंदिर दान विवाद: गिरफ्तार आरोपी ने किए कई खुलासे, अनिल मिश्रा को लेकर ये कहा
राम मंदिर दान विवाद में पुलिस ने एक आरोपी से 2 घंटे तक पूछताछ की है

राम मंदिर दान विवाद: गिरफ्तार आरोपी ने किए कई खुलासे, अनिल मिश्रा को लेकर ये कहा

लेखन आबिद खान
Jul 01, 2026
12:13 pm

क्या है खबर?

अयोध्या के राम मंदिर दान विवाद में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। बीते दिन पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपी अविनाश शुक्ला से करीब 2 घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान उसने दान चोरी के तरीके और राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व न्यासी अनिल मिश्रा और पूर्व महासचिव चंपत राय को लेकर अहम बातें बताईं। अविनाश ने पुलिस पूछताछ में दान राशि से करोड़ों रुपये की चोरी भी स्वीकार की है।

पूछताछ

मंदिर में भर्ती के लिए मिश्रा पर कमीशन लेने का शक

पूछताछ के दौरान, अविनाश ने अनिल के बारे में दावा किया कि उन्होंने दान की गिनती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। NDTV के मुताबिक, जांच में पता चला कि राम मंदिर के अधिकांश कर्मचारियों की भर्ती अनिल की सिफारिश पर हुई थी। मंदिर में कम से कम 125 कर्मचारियों को अनिल की सिफारिश पर नौकरी मिली, जिनमें उनके कुछ रिश्तेदार भी शामिल हैं। SIT अनिल द्वारा नौकरियों के लिए कमीशन लेने के आरोपों की भी जांच कर रही है।

चाबी

टिन्नू के पास रहती थी गणना कक्ष की एक चाबी 

इंडिया टुडे के मुताबिक, अविनाश ने पुलिस को बताया कि दान की गिनती वाले कमरे की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक कर्मचारियों के पास थी। आरोपी ने पुलिस को बताया कि टिन्नू की मिलीभगत से चोरी करना आसान हो गया था। बता दें कि टिन्नू चंपत राय का सहयोगी और ड्राइवर है। दावा है कि उसके घर से पुलिस ने भारी मात्रा में सोना बरामद किया था।

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तरीका

कैमरों से बचकर बाथरूम में छिपाते थे पैसे

अविनाश ने बताया कि सभी लोग एक गिरोह की तरह काम करते थे। एक व्यक्ति पैसे चुराता था और कैमरों से बचने के लिए बाकी लोग उसे घेर लेते थे। इसके बाद पैसे को बाथरूम में छिपा दिया जाता था और मौका मिलते ही निकाल लिया जाता था। अविनाश ने बताया कि ट्रस्ट के अधिकारियों के करीबी होने के कारण उनकी जांच नहीं की गई। इन पैसों से बाद में संपत्ति खरीदी गई।

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बरामदगी

FIR से पहले ही बरामद हो चुके थे 58 लाख रुपये

यह भी खुलासा हुआ है कि ट्रस्ट ने 5 जून को अविनाश के घर से 58 लाख रुपये बरामद किए थे। इससे यह पता चलता है कि मामले में औपचारिक रूप से कानूनी प्रक्रिया शुरू करने से पहले ही गबन की गई धनराशि को वापस पाने के प्रयास शुरू हो चुके थे। वहीं, जांच को लेकर गठित SIT का समय भी बढ़ाकर 15 जुलाई तक कर दिया गया है। जांच का दायरा भी बढ़ाया जा सकता है।

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