प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से किया 'शक्ति की सप्तधारा' का आह्वान, जानिए यह क्या है
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर लगातार 13वीं बार ध्वजारोहण किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से भारत को विकसित बनाने के लिए 'शक्ति की सप्तधारा' का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले 5-7 साल में सप्तधारा के सामर्थ्य से हम देश को नई ऊंचाई, नई गति देंगे और नए लक्ष्य हासिल करने में समर्थ होंगे। ऐसे में आइए जानते हैं यह 'शक्ति की सप्तधारा' क्या है।
आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने कैसे किया आह्वान?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आज मैं उस युग को याद करना चाहता हूं जब राष्ट्र भारत की शक्ति को 'सप्त सिंधु' के रूप में जानता, समझता और सुनता था। अब, एक विकसित भारत के निर्माण के लिए हमें एक नई धारा की आवश्यकता है। मैं राष्ट्र के समक्ष शक्ति की 'सप्तधारा' का आह्वान करता हूं। हमने पिछले 5-7 दशकों में जो हासिल नहीं किया वह आने वाले 5-7 सालों में इस सप्तधारा की शक्ति और सामर्थ्य से हासिल कर सकेंगे।"
सवाल
क्या है शक्ति की सप्तधारा?
शक्ति की सप्ताधारा मुख्य रूप से उन 7 क्षेत्रों (स्रोतों) पर केंद्रित है जो आगामी वर्षों में भारत के सामाजिक, आर्थिक और रणनीतिक ढांचे को बदल देंगे।
इनमें विनिर्माण क्षमता, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी और नवाचार, गति शक्ति, रक्षा शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा, हरित अर्थव्यवस्था और नीली अर्थव्यवस्था और भारत की सॉफ्ट पावर शामिल है।
इन क्षेत्रों में सुधार करते हुए ही भारत विकसित होने की दिशा में आवश्यक सभी जरूरतों को समय पर पूरी कर सकता है।
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विनिर्माण शक्ति और कृषि में क्या आएगा बदलाव?
विनिर्माण शक्ति में भारत को केवल छोटे पुर्जे बनाने तक सीमित नहीं रहना है। डिजाइन से लेकर अंतिम उत्पाद तक भारत को पूरी 'वैल्यू चेन' पर अपनी पकड़ मजबूत कर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक विश्वसनीय केंद्र बनना होगा।
इसी तरह, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण में दुनिया के बाजारों और नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से भारतीय किसानों को सीधे वैश्विक निर्यात बाजार से जोड़ा जाएगा। भारत के पारंपरिक खानपान को 'वैश्विक ब्रांड' बनाने पर जोर दिया जाएगा।
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प्रौद्योगिकी और नवाचार के साथ गति शक्ति में क्या होगा?
प्रौद्योगिकी और नवाचार के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डाटा सेंटर, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत को दुनिया का इनोवेशन हब बनाया जाएगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (UPI) की सफलता के बाद अब पूर्ण स्वदेशी '6G संचार तकनीक' तक पहुंचाना अगला लक्ष्य है।
इसी प्रकार, गति शक्ति में व्यापार और उद्योगों को रफ्तार देने के लिए बुनियादी ढांचे का तीव्र आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसमें नई हाई-स्पीड ट्रेनें, एक्सप्रेसवे, आधुनिक हवाई अड्डे और बंदरगाह आधारित विकास शामिल हैं।
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रक्षा शक्ति और हरित अर्थव्यवस्था में क्या किया जाएगा?
रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाकर केवल घरेलू बाजार की जरूरतें पूरी नहीं करनी हैं, बल्कि अगली पीढ़ी की सैन्य तकनीकों, स्वदेशी ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के विकास के माध्यम से भारत को एक 'वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता' बनाना है।
इसी प्रकार ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और एनर्जी स्टोरेज प्रणालियों में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना होगा।
नीली अर्थव्यवस्था के तहत समुद्री मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और महासागर प्रौद्योगिकी के नए रास्ते खोले जाएंगे।
जानकारी
भारत की सॉफ्ट पावर को कैसे मजबूत किया जाएगा?
सॉफ्ट पावर में योग, आयुर्वेद, हस्तशिल्प, भारतीय फिल्में, एनिमेशन, गेमिंग, डिजिटल कंटेंट और देश की समृद्ध आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत के जरिए दुनिया भर में भारत के वैश्विक प्रभाव और पहचान को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
उद्देश्य
क्या है इस पहल का उद्देश्य?
इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों को गति देना है जो पिछले कई दशकों से लंबित या धीमी गति से चल रहे थे।
इसी तरह देश के युवाओं (Gen Z) की ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता को सीधे राष्ट्र निर्माण से जोड़ा जाएगा। युवाओं को AI का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग जैसी सुविधाएं देना भी शामिल है।
ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता पूरी तरह खत्म किया जाएगा।