पेट्रोल-डीजल, दवाएं और सोयाबीन तेल; ईरान-इजरायल युद्ध से देश में क्या-क्या महंगा हो सकता है?
क्या है खबर?
ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध को आज 7 दिन हो चुके हैं। इजरायल और अमेरिका लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम रास्ता है। ईरान के इस कदम से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं और धीरे-धीरे इनका असर और चीजों पर भी दिखाई देगा। आइए समझते हैं क्या-क्या महंगा हो सकता है।
पेट्रोल-डीजल
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर होगा सबसे ज्यादा असर
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कच्चे तेल के 5वां हिस्से का परिवहन होता है। साथ ही भारी मात्रा में LNG की आपूर्ति भी होती है। ईरान ने सऊदी अरब की रास तनूरा रिफाइनरी पर भी हमला किया है। इससे तेल की कीमत एक हफ्ते में करीब 20 प्रतिशत बढ़ गई है। भारत में भी पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है।
सरकार
पेट्रोल-डीजल को लेकर सरकार का क्या कहना है?
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, निकट भविष्य में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है। सरकार का कहना है कि फिलहाल 25-30 दिन का कच्चे तेल का स्टॉक है। इसके अलावा सरकार अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही है। इसमें केप ऑफ गुड होप के जरिए आयात शामिल है। हालांकि, इससे परिवहन लंबा और खर्चीला होगा। रूस ने कहा है कि वो भारत की ऊर्जा जरूरत पूरी करने को तैयार है।
खाद्य तेल
खाद्य तेल की कीमतें भी बढ़ने की आशंका
भारत में खाद्य तेल की कीमतें भी बढ़ सकती है। भारत ताड़ का तेल मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से, जबकि सोयाबीन तेल अर्जेंटीना, ब्राजील और अमेरिका से आयात करता है। सूरजमुखी तेल रूस और यूक्रेन से आयात किया जाता है। इनका ज्यादातर आयात होर्मुज जलडमरूमध्य और स्वेज नहर से होता है। युद्ध के चलते इन समुद्री मार्ग में बाधा निरंतरता को प्रभावित कर सकती है और कीमतों में अल्पकालिक अस्थिरता पैदा कर सकती है।
दाल
बढ़ सकती हैं दालों की कीमत
ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा, "अगर युद्ध एक हफ्ते से ज्यादा चलता है, तो दालों की कीमतें बढ़ जाएंगी।" इसकी वजह है कि भारत म्यांमार, कनाडा और अफ्रीका से हर साल लगभग 5-6 मिलियन टन दालें आयात करता है, जिनमें तुअर, उड़द और अन्य मसूर दालें शामिल हैं। माल ढुलाई लागत में वृद्धि से मसूर दालों के आयात मूल्य पर असर पड़ेगा।
सूखे मेवे
काजू-बादाम समेत सूखे मेवों की कीमतें भी बढ़ना तय
सूखे मेवों के आयात पर भी असर पड़ सकता है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत ईरान और अफगानिस्तान से अंजीर, बादाम, पिस्ता, किशमिश, केसर और खुबानी आयात करता है। मुंबई ड्राईफ्रूट एंड डेट मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय भूटा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, "आने वाले समय में सूखे मेवों और नट्स की आपूर्ति ठप हो सकती है। वाघा सीमा बंद होने के चलते अफगानिस्तान से माल ईरान के रास्ते भेजा जा रहा है।"
दवाएं
दवाएं भी हो सकती है महंगी
भारत कई सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (API) के लिए चीन पर निर्भर है, लेकिन उच्च स्तरीय प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (KSM) और विशेष रसायनों का आयात यूरोप से करता है। मनीकंट्रोल से बात करते हुए एक विशेषज्ञ ने कहा, "इन आयातों में संभावित देरी से जटिल जेनेरिक दवाओं और मूल्यवर्धित दवाओं का उत्पादन रुक सकता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से सॉल्वैंट्स और रासायनिक मध्यवर्ती पदार्थों की लागत बढ़ सकती है, जो दवा निर्माण के लिए जरूरी है।"