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नौसेना को मिलने जा रही तीसरी परमाणु संचालित पनडुब्बी, K-4 मिसाइलों से होगी लैस; जानें खासियत
नौसेना को जल्द ही तीसरी परमाणु संचालित पनडुब्बी मिलने जा रही है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नौसेना को मिलने जा रही तीसरी परमाणु संचालित पनडुब्बी, K-4 मिसाइलों से होगी लैस; जानें खासियत

लेखन आबिद खान
Feb 20, 2026
10:35 am

क्या है खबर?

समुद्र में भारत की ताकत और बढ़ने जा रही है। नौसेना को जल्द ही तीसरी परमाणु संचालित पनडुब्बी अरिधमान मिलने जा रही है। माना जा रहा है कि अरिधमान को इसी साल अप्रैल-मई में नौसेना में शामिल किया जा सकता है। ये स्वदेशी अरिहंत श्रेणी की तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) होगी। टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से कहा कि पनडुब्बी वर्तमान में समुद्री परीक्षण के अंतिम चरण में है।

हथियार

K-4 और K-15 मिसाइलों की जद में आएगा पूरा एशिया

अरिधमान 2 प्रमुख स्वदेशी मिसाइलों से लैस होगी। इसमें 24 K-15 मिसाइलें हैं, जिनकी मारक क्षमता 750 किलोमीटर है। वहीं, दूसरी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल K-4 है, जिसकी रेंज 3,000 किलोमीटर से भी ज्यादा है। यानी पनडुब्बी के नौसेना में शामिल होने के बाद एशिया के ज्यादातर हिस्से तक भारत की पहुंच होगी। इन मिसाइलों की मदद से भारत समुद्र के भीतर से ही दुश्मन के दूरदराज के ठिकानों पर हमला करने में सक्षम होगा।

खासियत

क्या है अरिधमान की खासियत?

अरिधमान तकनीकी रूप से अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बी है, लेकिन ताकत और आकार में यह काफी आगे है। पहली पनडुब्बी INS अरिहंत केवल 750 किलोमीटर रेंज वाली K-15 मिसाइलें ले जा सकती थी, वहीं अरिधमान को लंबी दूरी की जंग के लिए तैयार किया गया है। अरिधमान में 8 मिसाइल लॉन्च ट्यूब्स हैं, जबकि अरिहंत में 4 हैं। इसके सेवा में आने के बाद, भारत के पास पहली बार सामरिक बल कमान (SFC) के तहत 3 बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां होंगी।

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लक्ष्य

कितनी अहम है पनडुब्बी?

नौसेना को पनडुब्बी मिलने से भारत 'निरंतर समुद्री प्रतिरोध' हासिल करने के करीब पहुंच जाएगा। ये एक रणनीतिक रक्षा नीति है, जिसके तहत कोई भी देश साल के 365 दिन कम से कम एक पनडुब्बी को गश्त पर रखता है। ये भारत के 'न्यूक्लियर ट्रायड' बनने की दिशा में भी अहम कदम है। इसका मतलब किसी देश के पास जमीन, हवा और पानी तीनों जगहों से परमाणु हमला करने की क्षमता होना।

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पनडुब्बी

INS अरिहंत से कितनी अलग है अरिधमान?

अरिधमान का निर्माण विशाखापत्तनम स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर में किया गया है। यह पिछले कई महीनों से समुद्री परीक्षणों से गुजर रही है। यह INS अरिहंत से लंबी है और इसका वजन (डिस्प्लेसमेंट) भी ज्यादा है। इसमें 83 मेगावाट का प्रेशराइज्ड लाइट-वाटर रिएक्टर लगा है, जो इसे लंबे समय तक पानी में रहने के लिए सक्षम बनाता है। इसमें एनेकोइक टाइल्स हैं, जो इसकी आवाज को कम कर दुश्मन के रडार और सोनार से बचाव में मदद करती हैं।

परमाणु पनडुब्बी

क्या होती है परमाणु पनडुब्बी?

ऐसी पनडुब्बी जो परमाणु ऊर्जा से चलती है, उसे परमाणु पनडुब्बी कहा जाता है। इनमें परमाणु हथियार हो भी सकते हैं या नहीं भी, लेकिन ये परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होती हैं। इनका सबसे बड़ा फायदा होता है कि ये हफ्तों ये सालों तक चुपचाप पानी के भीतर रह सकती हैं, क्योंकि इन्हें पारंपरिक पनडुब्बियों की तरह ईंधन या हवा के लिए बार-बार सतह पर नहीं आना पड़ता।

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