नरवणे विवाद के बाद आला अधिकारियों के किताब लिखने पर पाबंदियां लगा सकती है सरकार- रिपोर्ट
क्या है खबर?
पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सरकार ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसके तहत बड़े सरकारी पदों पर रहे लोगों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद कम से कम 20 साल का 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' तय किया जा सकता है।
रिपोर्ट
मंत्रिमंडल बैठक में किताब को लेकर हुई चर्चा- रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी इस 20 साल के 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' के दौरान अपनी किताब या संस्मरण प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में जल्द ही औपचारिक आदेश जारी होने की संभावना है। अखबार ने बताया कि 13 फरवरी को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में नरवणे की किताब को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान कई मंत्रियों का मानना था कि अहम सरकारी पदों पर रहे लोगों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद किताब लिखने के लिए 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' होना चाहिए।
बैठक
बैठक में और किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
बैठक के दौरान अमेरिकी यौन अपराधी और फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी हाल ही में जारी फाइलों का मुद्दा भी उठा। हिंदुस्तान टाइम्स को अधिकारियों ने बताया कि मंत्रियों की राय थी कि सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख बनाए रखना चाहिए और विपक्ष के आरोपों का जवाब नहीं देना चाहिए। बता दें कि एपस्टीन मामले में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सामने आया है, जिसे लेकर विवाद हो रहा है।
विवाद
किताब को लेकर क्या है विवाद?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की किताब की भौतिक प्रति संसद परिसर में पत्रकारों को दिखाई थी। जबकि यह दावा किया जा रहा था कि किताब अभी अप्रकाशित है और बाजार में उपलब्ध नहीं है। राहुल ने किताब के हवाले से संसद में सरकार और प्रधानमंत्री को लेकर कई दावे किए थे, जिस पर संसद में भी खूब हंगामा हुआ था। मामले में पुलिस ने प्रकाशक पेंगुइन इंडिया को नोटिस भी जारी किया है।
अंश
किताब में ऐसा क्या लिखा है?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि किताब में 2020 में चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में हुए सैन्य विवाद के बारे में जानकारी है। किताब में गलवान घाटी की झड़प और अग्निपथ योजना का भी जिक्र है। सबसे ज्यादा विवाद इस बात पर है कि चीनी उकसावे का जवाब भारत को किस तरह देना है, इस पर राजनीतिक दिशानिर्देशों की कमी थी। ये किताब जनवरी 2024 में प्रकाशित होनी थी।