कुलगाम आतंकी हमले के पीछे लश्कर कमांडर लतीफ का हाथ होने का शक- रिपोर्ट
क्या है खबर?
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में प्रवासी मजदूरों पर हुए आतंकी हमले में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की भूमिका सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि लश्कर कमांडर लतीफ भट और उसका सहयोगी हालिया लक्षित हमलों के लिए जिम्मेदार है। एजेंसियों का मानना है कि लतीफ के सहयोगी वारिस शाह ने हमलों के लिए रसद संबंधी सहायता और रेकी की थी। बता दें इस हमले में छत्तीसगढ़ के 2 मजदूर मारे गए हैं।
रिपोर्ट
राइफल के बजाय छोटी पिस्तौल का किया गया इस्तेमाल- रिपोर्ट
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ता कुलगाम हमले की योजना और क्रियान्वयन की जांच कर रहे हैं। लतीफ की भूमिका पर शक है, जो कुलगाम, शोपियां और अनंतनाग में सक्रिय रहा है।
जांच में सामने आया है कि पहले पुलिसकर्मी और अब मजदूरों पर हमले में AK-47 के बजाय छोटी पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया।
ये तरीका आमतौर पर 'हाइब्रिड आतंकवादी' अपनाते हैं, जो स्थानीय स्तर पर भर्ती किए जाते हैं और हमले के बाद नागरिकों में छिप जाते हैं।
बयान
TRF की कार्यशैली से मिलता जुलता है हमला
अधिकारियों का मानना है कि दोनों हमलों का तरीका LeT की शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से मिलता जुलता है।
एक अधिकारी ने कहा, "TRF के लड़ाके त्वरित पिस्तौल हमलों के लिए जाने जाते हैं और भीड़ में गायब हो जाते हैं। उनके पास न बड़े हथियार होते हैं, न ही वे बड़ी संख्या में आते हैं। इससे वे पकड़ में नहीं आते। इसका उद्देश्य स्पष्ट है- डर फैलाना और संदेश देना कि कश्मीर में स्थिति अभी भी नाजुक है।"
परिचय
कौन है लतीफ भट?
लतीफ लश्कर का कमांडर है, जो शोपियां मुठभेड़ के बाद सुर्खियों में आया था। वो पहले लश्कर के शीर्ष कमांडर जाकिर गनाई के साथ काम करता था, जो A++ श्रेणी का आतंकवादी था।
शोपियां मुठभेड़ में जाकिर मारा गया था, लेकिन लतीफ तब भाग निकला था।
एजेंसियों का मानना है कि इसके बाद उसने अनंतनाग और कुलगाम में लक्षित हमले किए, ताकि यह साबित किया जा सके कि जाकिर की मौत के बावजूद आतंकी नेटवर्क अभी भी सक्रिय है।
हमले
10 दिन में 2 लक्षित हमले, 3 की मौत
जम्मू-कश्मीर में बीते 10 दिन में आतंकी हमले में 3 लोगों की मौत हो गई है।
कल देर शाम को आतंकियों ने ईंट भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के 2 मजदूरों को गोली मार दी थी। इसमें एक मजदूर की मौके पर ही, जबकि दूसरी की इलाज के दौरान मौत हो गई।
इससे पहले 22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक पर आतंकियों ने हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या कर दी थी।