राष्ट्रमंडल खेल 2026: कौन हैं हर्ष सिंह, जिन्होंने जूडो में स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास?
क्या है खबर?
भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल (CWG) 2026 में अपनी बादशाहत साबित कर दी है। महिलाओं में अस्मिता डे के ऐतिहासिक स्वर्ण पदक के ठीक बाद पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में हर्ष सिंह ने भी स्वर्ण पदक जीतते हुए इतिहास रच दिया। वह CWG में जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने हैं। उन्होंने फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को 10-0 के स्कोर से हराकर यह उपलब्धि हासिल की।
मुकाबला
हर्ष ने कैसे हासिल किया स्वर्ण पदक?
हर्ष ने मैच की शुरुआत में ही शानदार बढ़त बनाए रखी और काट्ज को स्कोर करने का कोई मौका नहीं दिया।
उन्होंने दृढ़ता से बचाव किया और सटीक आक्रमण किए, जिससे मैच के अंत तक 10-0 की शानदार जीत सुनिश्चित हो गई।
इससे पहले उन्होंने क्वार्टर फाइनल में एलन मोंथौएल के खिलाफ बड़े अंतर से जीत हासिल की थी।
इसी तरह सेमीफाइनल में उन्होंने पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को हराकर स्वर्ण पदक मैच में अपनी जगह पक्की की थी।
सफर
अखाड़े की मिट्टी से अंतरराष्ट्रीय मैट तक का सफर
हर्ष का जन्म 24 मई, 2003 को हरियाणा के पानीपत जिले के छोटे से गांव में हुआ था।
हर्ष के दादाजी अपने जमाने के स्थानीय मिट्टी के अखाड़ों के नामी पहलवान थे। वह चाहते थे कि हर्ष देश के लिए कुश्ती में नाम कमाए।
हालांकि, हर्ष ने कुश्ती के बजाय जूडो को चुना। उनके पिता साधारण किसान हैं।
उन्होंने बेहद सीमित संसाधनों के बावजूद हर्ष की डाइट और प्रशिक्षण के खर्चों के लिए बैंक से लोन लेकर उन्हें आगे बढ़ाया।
शुरुआत
हर्ष ने 11 साल की उम्र में शुरू की थी जूडो की शुरुआत
हर्ष ने महज 11 साल की उम्र में पानीपत के एक स्थानीय क्लब में जूडो सीखना शुरू किया था।
उनकी गति और विरोधी खिलाड़ी को ग्रिप करने की तकनीक को देखते हुए कोचों ने उन्हें भविष्य का स्टार मान लिया था।
हर्ष ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में लगातार 2 स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया था।
इसके बाद उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के भोपाल और फिर दिल्ली केंद्र में विशेष प्रशिक्षण के लिए चुना गया।
जानकारी
साल 2024 में चोट ने किया खेलों से दूर
हर्ष को साल 2024 में एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान घुटने में गंभीर लिगामेंट की चोट आई थी, जिसके कारण वह करीब 8 महीने मैट से दूर रहे। इस मुश्किल समय में उनके परिवार और दोस्तों ने उनका मानसिक हौसला बनाए रखा।
उपलब्धियां
हर्ष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हासिल की है ये उपलब्धियां
हर्ष ने साल 2023 में जूनियर एशियन जूडो चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहली बड़ी मौजूदगी दर्ज कराई थी।
उसके बाद साल 2024-25 में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में लगातार स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने 60 किलोग्राम भार वर्ग में भारत के नंबर-1 जूडोका के रूप में खुद को स्थापित किया।
साल 2025 में कासाब्लांका ओपन के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीनियर सर्किट में कदम रखते हुए मोरक्को में कांस्य पदक जीता था।