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राष्ट्रमंडल खेल 2026: कौन हैं यामिनी मौर्य, जिन्होंने जूडो स्पर्धा में जीता रजत पदक?
भारत की यामिनी मौर्य ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में जूडो में रजत पदक जीता है

राष्ट्रमंडल खेल 2026: कौन हैं यामिनी मौर्य, जिन्होंने जूडो स्पर्धा में जीता रजत पदक?

Aug 01, 2026
11:14 am

क्या है खबर?

भारत की उभरती हुई जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में देश को गौरवान्वित करते हुए महिलाओं के 57 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक अपने नाम कर लिया है। उन्होंने रोमांचक फाइनल मुकाबले में गजब के जज्बे का प्रदर्शन किया। निर्धारित समय में स्कोर के बराबरी पर रहने के बाद मुकाबला 'गोल्डन स्कोर' (अतिरिक्त समय) में पहुंचा, जहां एक छोटी पेनल्टी चूक के कारण यामिनी को स्वर्ण पदक से हाथ धोना पड़ा।

प्रदर्शन

फाइनल में कैसा रहा यामिनी का प्रदर्शन?

फाइनल में यामिनी और इंग्लैंड की असेल्या टोपराक के बीच बेहद रोमांचक मुकाबला हुआ। 4 मिनट के निर्धारित समय तक दोनों खिलाड़ियों ने शानदार डिफेंस दिखाया और कोई भी अंक नहीं बना सका।

मैच 'गोल्डन स्कोर' में पहुंचा, जहां मुकाबला और अधिक आक्रामक हो गया। आखिरकार एक छोटी सी तकनीकी चूक और पेनल्टी (शिडो) मिलने के कारण यामिनी स्वर्ण पदक से चूक गईं और उन्हें ऐतिहासिक रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा।

बधाई

यामिनी को प्रधानमंत्री मोदी ने भी दी बधाई

फाइनल में हार के बाद भी यामिनी ने अपने जुझारू खेल से दुनिया भर के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।

इस सफलता पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी।

इससे पहले उन्होंने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए घाना की फ्रेमा अगेई को इप्पोन में हराया था।

इसी तरह सेमीफाइनल मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका की डोने ब्रेटनबाख को भी इप्पोन से धराशाही करते हुए फाइनल के लिए टिकट बुक कराया था।

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संघर्ष

बेहद संघर्षपूर्ण रहा है यामिनी का खेल सफर

यामिनी मूल रूप से मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहने वाली हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है।

उनका परिवार आज भी एक कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। घर की माली हालत ठीक न होने के बावजूद उनके माता-पिता ने यामिनी के खिलाड़ी बनने के सपने को कभी टूटने नहीं दिया।

उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि उनका सपना राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतना और माता-पिता को पक्का मकान देना है।

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शुरुआत

यामिनी ने जूडो मैट के बिना ही शुरु किया था अभ्यास

यामिनी ने जब स्कूल के दिनों में जूडो सीखना शुरू किया था, तब उनके पास अभ्यास करने के लिए पेशेवर जूडो मैट तक नहीं थे।

वह साधारण गद्दों पर ही इस खेल की बारीकियां सीखती थीं। साल 2024 में उनके घुटने में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद उनका बड़ा ऑपरेशन हुआ।

वह लगभग एक साल तक जूडो मैट से पूरी तरह दूर रहीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कड़ी पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरते हुए शानदार वापसी की।

जानकारी

IIS ने निखारी यामिनी की प्रतिभा

यामिनी की प्रतिभा को निखारने में इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (IIS) का बड़ा हाथ रहा है, जहां उन्हें आधुनिक सुविधाएं और बेहतरीन कोच मिले। उनका अगला लक्ष्य अब रजत पदक को स्वर्ण पदक में बदलने का है।

उपलब्धियां

यामिनी ने हासिल की है ये अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां

यामिनी ने चीन में आयोजित वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स की -57 किग्रा जूडो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार सबका ध्यान अपनी और खींचा था।

इससे पहले उन्होंने उन्होंने बैंकॉक में आयोजित एशियन अंडर-18 चैंपियनशिप 2015 कांस्य पदक, एशियन ओपन ताइपे 2025 में रजत पदक, एशियन ओपन हांगकांग 2025 में स्वर्ण पदक और डकार अफ्रीकन ओपन 2026 में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।

इतिहास

पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय जूडो खिलाड़ी

यामिनी 2026 के राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय जूडो खिलाड़ी हैं।

उनसे पहले अस्मिता डे (महिला 48 किलोग्राम) और हर्ष सिंह (पुरुष 60 किलोग्राम) ने अपनी-अपनी श्रेणियों में स्वर्ण पदक जीते थे।

यह रजत पदक राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में भारत का कुल 14वां पदक रहा।

न्यूज18 के अनुसार, नरेंद्र सिंह इन खेलों में जूडो में पदक जीतने वाले पहले भारतीय थे, जिन्होंने 1990 में ऑकलैंड में पुरुषों के एक्स्ट्रा-लाइटवेट वर्ग में कांस्य जीता था।

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