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काबुल में भारतीय दूतावास खोलने की तैयारी, अफगानिस्तान के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ साझा आह्वान
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी 16 अक्टूबर तक भारत की यात्रा पर हैं (तस्वीर: एक्स/@sidhant)

काबुल में भारतीय दूतावास खोलने की तैयारी, अफगानिस्तान के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ साझा आह्वान

लेखन गजेंद्र
Oct 10, 2025
01:00 pm

क्या है खबर?

अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान की पहली भारतीय राजनयिक यात्रा के बाद भारत और अफगानिस्तान के संबंधों में विस्तार हो सकता है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तालिबानी समकक्ष आमिर खान मुत्तकी के साथ बैठक में काबुल में 4 साल के बंद भारतीय दूतावास खोलने की तैयारी पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि काबुल में तकनीकी मिशन को दूतावास में अपग्रेड किया जाएगा। साथ ही भारत अफगानिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को फिर बहाल करने पर काम करेगा।

मदद

दूतावास को लेकर घोषणा की

जयशंकर ने बातचीत के दौरान कहा, "भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारे बीच घनिष्ठ सहयोग आपके राष्ट्रीय विकास के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता और लचीलेपन में भी योगदान देता है। इसे और मजबूत करने के लिए, मुझे आज काबुल स्थित भारत के तकनीकी मिशन को भारतीय दूतावास के स्तर पर उन्नत करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।" भारत अफगानिस्तान के साथ खनन और जलापूर्ति में भी सहयोग करेगा।

संबंध

आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई का आह्वान

जयशंकर ने आगे कहा, "विकास और समृद्धि के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता है। ये दोनों देशों द्वारा सामना किए जा रहे सीमापार आतंकवाद के साझा खतरे में हैं। हमें आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से निपटने के लिए प्रयासों का समन्वय करना होगा। हम भारत की सुरक्षा चिंताओं के प्रति आपकी संवेदनशीलता और आपकी एकजुटता की सराहना करते हैं।" जयशंकर ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ साझा सुरक्षा पर साथ आने की मंशा जताई है।

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बंद

4 साल से बंद है दूतावास

काबुल में 4 साल बाद दूतावास खोलने को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अभी तक भारत ने तालिबान शासन को आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी है। भारत ने अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के कब्जे के बाद 2021 में अपने दूतावास और वाणिज्य दूतावास बंद कर दिया था। हालांकि, 2022 में भारत ने एक तकनीकी टीम अफगानिस्तान भेजी थी, जो तब से दूतावास में है। जयशंकर और मुत्ताकी की बातचीत को मजबूत क्षण माना जा रहा है।

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बयान

तालिबान ने कहा- अफगानिस्तान की जमीन भारत के खिलाफ उपयोग नहीं होगी

जयशंकर के बाद तालिबान के विदेश मंत्री ने काबुल में दूतावास खोलने के फैसले का स्वागत किया और दोनों देशों के बीच अपने संपर्क और आदान-प्रदान बढ़ाने पर जोर दिया। मुत्तकी ने पाकिस्तान को संदेश देते हुए कहा, "अफगानिस्तान भारत को घनिष्ठ मित्र मानता है। हम किसी भी समूह को अपनी जमीन का इस्तेमाल दूसरों के खिलाफ करने की इजाजत नहीं देंगे। अफगानिस्तान आपसी सम्मान, व्यापार और लोगों के बीच आपसी संबंधों पर आधारित संबंध चाहता है।"

जवाब

भारत-अफगानिस्तान की नजदीकी से पाकिस्तान को कड़ा जवाब

अफगानिस्तान-भारत की बैठक पाकिस्तान के लिए कई मायनों में मिर्ची लगने जैसी होगी, क्योंकि पाकिस्तान-अफगानिस्तान के संबंधों में तनाव बढ़ रहा है। पाकिस्तान अफगानिस्तान को अपने यहां तालिबानी हमले का जिम्मेदार ठहराता है। मुत्ताकी जब भारत में हैं, तब गुरुवार को पाकिस्तान ने काबुल में तालिबानी आतंकियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। दूसरी तरफ, तालिबानी मंत्री ने भारतीय कंपनियों को अफगानिस्तान में खनन के लिए भी आमंत्रित किया है, जो पाकिस्तान-अमेरिका के बढ़ते सहयोग की पृष्ठभूमि में है।

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