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वायुसेना के लिए 114 राफेल खरीदने की तैयारी, 3.25 लाख करोड़ के समझौते की बड़ी बातें
भारत 114 राफेल विमानों को खरीदने की योजना बना रहा है

वायुसेना के लिए 114 राफेल खरीदने की तैयारी, 3.25 लाख करोड़ के समझौते की बड़ी बातें

लेखन आबिद खान
Jan 14, 2026
01:26 pm

क्या है खबर?

भारत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है। रक्षा मंत्रालय की जल्द होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम चर्चा होगी। इस समझौते की अनुमानित कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये होगी। समझौते के तहत, ज्यादातर विमानों का निर्माण भारत में ही करने का इरादा है, जिनमें 30 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल की जाएगी। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद वायुसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में ये सबसे बड़ा कदम होने जा रहा है।

समझौता

12 से 18 विमान 'रेडी टू फ्लाय' स्थिति में मिलेंगे- रिपोर्ट

समाचार एजेंसी ANI ने रक्षा सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस समझौते में भारतीय वायुसेना को 12 से 18 विमान तैयार मिलेंगे। बाकी विमानों का निर्माण भारत में होगा, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत भारतीय सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, 'मेक इन इंडिया' के मानकों में 50-60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री की अपेक्षा होती है, लेकिन इस सौदे में ये आंकड़ा कम है। अगले 2-3 दिन में इस समझौते पर चर्चा होने की उम्मीद है।

समझौता

इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा समझौता

अगर इस समझौते को मंजूरी मिलती है, तो यह भारत की अब तक की सबसे बड़ा रक्षा समझौता होगा। इसके बाद भारत के पास 176 राफेल लड़ाकू विमान हो जाएंगे। वर्तमान में वायुसेना के पास 36 राफेल विमान पहले से ही मौजूद हैं। भारतीय नौसेना ने पिछले साल 26 राफेल विमानों का ऑर्डर दिया था। वायुसेना ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों से जुड़ा प्रस्ताव कुछ महीने पहले रक्षा मंत्रालय को सौंप दिया था।

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हथियार

विमानों में भारतीय हथियार लगाना चाह रहा है भारत

प्रस्ताव के अनुसार, भारत फ्रांस से यह चाह रहा है कि वह विमान में भारतीय हथियारों और दूसरे स्वदेशी प्रणालियों को इंटीग्रेट करने की अनुमति दे। हालांकि, इनके सोर्स कोड फ्रांस के पास ही रहेंगे। सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का फैसला 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान राफेल के प्रदर्शन को देखते हुए लिया गया, जिन्होंने अपने स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट का इस्तेमाल कर चीनी PL-15 मिसाइलों का सफलतापूर्वक मुकाबला किया था।

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इंजन

विमान के इंजन के लिए MRO सुविधा स्थापित कर सकता है फ्रांस 

फ्रांस इन विमानों में इस्तेमाल होने वाले M-88 इंजन के लिए एक मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा स्थापित करने की भी योजना बना रहा है। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने पहले ही भारत में फ्रेंच मूल के लड़ाकू विमान के रखरखाव में सहायता के लिए एक इकाई स्थापित की है। इस परियोजना में भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों की भी भागीदारी हो सकती है। टाटा जैसी कंपनी सीधे विमान के निर्माण में शामिल हो सकती है।

खासियत

क्या है राफेल विमानों की खासियत?

राफेल में मेटियोर बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) मिसाइल, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण, बेहतर रडार और संचार प्रणालियां हैं। स्पेक्ट्रा प्रणाली के चलते ये लंबी दूरी पर कई लक्ष्यों का पता लगा सकता है और दुश्मन के रडार से बच सकता है। इसका रडार 100 किलोमीटर के दायरे में एक साथ 40 लक्ष्य की पहचान कर सकता है। राफेल केवल एक मिनट में 18,000 फीट की ऊंचाई पर जा सकता है। ये एक बार में लगातार 10 घंटे की उड़ान भर सकता है।

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