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#NewsBytesExplainer: भारत-EU व्यापार समझौते को 'सभी समझौतों की जननी' क्यों कहा जा रहा, क्या होगा फायदा?
भारत-EU के बीच 27 जनवरी को मुक्त व्यापार समझौता होगा

#NewsBytesExplainer: भारत-EU व्यापार समझौते को 'सभी समझौतों की जननी' क्यों कहा जा रहा, क्या होगा फायदा?

लेखन आबिद खान
Jan 21, 2026
01:45 pm

क्या है खबर?

करीब 20 साल चली बातचीत के बाद आखिरकार भारत और यूरोपीय संघ (EU) में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) होने जा रहा है। 27 जनवरी को होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक उथल-पुथल के बीच इस समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है। यही वजह है कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे 'सभी समझौतों की जननी' बताया है। आइए समझौते के बारे में जानते हैं।

आकार

ये भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता

EU के 27 देशों में वस्तुओं, सेवाओं और व्यापार नियमों को शामिल करते हुए ये भारत का अब तक का सबसे बड़ा और जटिल व्यापार समझौता है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था, "हमने अब तक 7 विकसित देशों के साथ FTA किए हैं। यह समझौता अब तक का सबसे बड़ा समझौता होगा। इसमें दुनिया की 2 सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाएं शामिल होंगी। यह समझौता सभी समझौतों की जननी होगा।"

दायरा

समझौते में क्या-क्या शामिल होगा?

इस समझौते की सबसे बड़ी खूबी इसका व्यापक दायरा है। शुल्क कटौती के अलावा इसमें सेवाओं, प्रौद्योगिकी प्रवाह, नियामक मानकों, डिजिटल नियमों और निवेश संरक्षण पर सहयोग शामिल है। इससे भारत को यूरोपीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में और अधिक गहराई से एकीकृत करने में मदद मिलेगी। साथ ही EU की कंपनियों को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक तक व्यापक पहुंच मिलेगी। भारत ने कृषि और डेयरी क्षेत्र को समझौते से बाहर रखा है।

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यूरोप

समझौते से EU को क्या-क्या फायदे होंगे?

यूरोपीय वाइन और स्पिरिट पर 150-200 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है, वो कम होगा और प्रमाणन प्रक्रिया सरल होगी। यूरोपीय कार निर्माताओं खासतौर पर प्रीमियम सेगमेंट वाहनों को भारत में आसानी से प्रवेश मिलेगा। यूरोप के मशीनरी, रसायन, चिकित्सा उपकरण, औद्योगिक उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातकों को सुगम नियामक स्थितियों और शुल्क कटौती से फायदा होगा। इंजीनियरिंग, परामर्श, दूरसंचार और बौद्धिक संपदा आधारित उद्योगों जैसे सेवा क्षेत्रों को भी निवेश और संचालन नियमों से फायदा होगा।

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भारत

भारत के लिए क्या है फायदे की बात?

भारत को श्रम प्रधान क्षेत्रों में बड़ा फायदा मिलेगा। वस्त्र, चमड़े के सामान और समुद्री उत्पादों पर फिलहाल 2 से 12 प्रतिशत तक शुल्क लगता है। इनके हटने से वस्त्र, चमड़ा, जूते और अन्य रोजगार-प्रधान उद्योगों को सीधा फायदा होगा, जो पहले से दबाव में हैं। भारत की जेनेरिक दवाओं और रासायनिक उत्पादों की यूरोपीय बाजार में पहुंच आसान होगी। भारतीय मशीनरी, पेट्रोलियम उत्पाद और विद्युत उपकरण निर्यात की यूरोप में पकड़ और मजबूत होगी।

चुनौतियां

कुछ चुनौतियां अभी भी बाकीं

भारत कुशल पेशेवरों की आवाजाही बढ़ाने और कृषि के लिए सुरक्षा उपाय चाहता है। भारत ने EU के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र पर भी चिंता जताई है। इससे स्टील, एल्युमीनियम और सीमेंट निर्यात प्रभावित हो सकते हैं। EU ऑटोमोबाइल क्षेत्र में और कटौती चाहता है। इससे भारत का घरेलू विनिर्माण कमजोर हो सकता है और जापान और दक्षिण कोरिया भी दबाव बढ़ा सकते हैं। हालांकि, दोनों पक्ष इन मुद्दों को सुलझाने में जुटे हैं।

आंकड़े

आंकड़ों में जानिए समझौते की अहमियत

समझौते से भारत और 27 देशों वाले EU के लगभग 2 अरब लोगों का एक संयुक्त बाजार बनेगा। इसके अलावा यह विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 25 प्रतिशत होगा। भारत का किसी भी देश के साथ अन्य व्यापार समझौते का आकार या आर्थिक दायरा इतना बड़ा नहीं है। EU फिलहाल वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2024-25 में EU के साथ भारत का सामान का द्विपक्षीय व्यापार 12 लाख करोड़ रुपये था।

बातचीत

साल 2007 से चल रही बातचीत

भारत-EU के बीच व्यापार समझौते को लेकर 2007 में बातचीत शुरू हुई थी। 2013 तक कई दौर की चर्चाएं हुईं, लेकिन ऑटोमोबाइल, शराब पर टैरिफ, भारतीय IT फर्मों के लिए डेटा सुरक्षा, बौद्धिक संपदा अधिकार, श्रम मानक और सार्वजनिक खरीद पर मतभेदों के कारण बात आगे नहीं बढ़ी। 2016 और 2020 के बीच फिर सीमित प्रगति हुई, लेकिन 2020 के बाद वार्ता में तेजी आई। जून, 2022 में भारत और EU ने फिर औपचारिक रूप से बातचीत शुरू की।

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