भारत और EU के व्यापार समझौते में एक परीक्षा बाकी, अगले साल से मिलेंगी सस्ती चीजें
क्या है खबर?
भारत और 27 देशों के यूरोपीय संघ (EU) के बीच भले ही ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हो गया है, लेकिन ये इस साल लागू नहीं होगा। इसे लागू होने के लिए अभी कई पड़ाव पार करने है, जिसमें 6 से 8 महीने का समय लगेगा। समझौता पूरी तरह से अगले साल से लागू होगा। यानी, लोगों को यूरोप से आने वाली सस्ती चीजों के लिए अभी एक साल और इंतजार करना होगा। आइए, इसका कारण जानते हैं।
कारण
समझौता अगले साल से क्यों होगा लागू?
भारत और EU के बीच FTA के लिए बातचीत 2022 में दोबारा शुरू की गई थी, जो पिछले साल तेज रफ्तार से बढ़ी, लेकिन आज इसकी घोषणा होने के बाद यह सिर्फ संवाद के अंतिम चरण तक पहुंचा है। यानी इसे अभी कानूनी रूप से लागू नहीं किया गया है बल्कि एक चरण आगे पहुंचा है। अब समझौते की कानूनी जांच (या दोनों पक्षों की कानूनी टीमों द्वारा संशोधन), अनुवाद और आंतरिक अनुमोदन सहित कई प्रक्रियात्मक चरण अभी बाकी हैं।
चरण
कानूनी जांच में लगेगा समय
अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक, समझौते पर मंगलवार को जो घोषणा हुई है, वह वार्ता के अंत का प्रतीक है। अभी इस पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले इसे एक कानूनी जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसमें 5 से 6 महीने का समय लग सकता है और अधिक भी हो सकता है। इसके बाद यूरोपीय संसद द्वारा पुष्टि होने के बाद यह व्यापार समझौता अगले साल की शुरुआत तक लागू हो जाएगा।
घोषणा
क्या आज की घोषणा के कोई मायने नहीं?
लोगों के मन में सवाल है कि अगर कानूनी जांच महत्वपूर्ण है तो भारत में EU अधिकारियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक के कोई मायने नहीं है? इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि मंगलवार की साझा घोषणा से समझौता वार्ता की कठिनाईयां अब खत्म हो गई हैं। अब केवल कानूनी पेचीदगी है, जो दोनों देश सुलझा सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद यूरोपीय संसद, यूरोपीय संघ परिषद और भारतीय कैबिनेट आगे बढ़ेगी।
ऐतिहासिक
क्यों ऐतिहासिक है ये समझौता?
इस समझौते को लेकर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन टैरिफ बाजार पहुंच और नियामक मानकों पर असहमति के कारण बातचीत 2013 में रुक गई। वैश्विक व्यापार तनाव बढ़ने के बाद 2022 में बातचीत फिर शुरू हुई और पिछले साल इसमें तेजी आई। अब 18 साल बाद यह सफल हुआ है। भारत और EU का संयुक्त बाजार लगभग दो अरब उपभोक्ताओं का है। समझौता दोनों देशों की बीच संबंध व्यापाक बनाएगा। भारत में कई चीजें सस्ती हो जाएंगी।