भारत-यूरोपीय संघ ने FTA से रचा इतिहास, भारत यूरोप के 97 प्रतिशत सामानों से टैरिफ हटाएगा
क्या है खबर?
भारत और 27 देशों के यूरोपीय संघ (EU) के बीच मंगलवार को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा की गई है, जो पिछले कई सालों से लंबित था। घोषणा 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा-कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर-लेयेन ने की। सम्मेलन से पहले मेहमानों ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया।
समझौता
भारत खत्म करेगा EU से 96.6 प्रतिशत सामानों पर टैरिफ
एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, EU प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भारत EU से निर्यात होने वाले 96.6 प्रतिशत सामानों पर टैरिफ कम करने या खत्म करने पर सहमति जताई है। EU ने कहा कि FTA के तहत वह भारत को अपना निर्यात दोगुना कर देगा और भारत के सर्विस मार्केट तक पहुंच बढ़ाएगा, खासकर फाइनेंशियल सर्विस, समुद्री सर्विस और दूसरे अहम सेक्टर में। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि टैरिफ कम होने से यूरोप के एग्री-फूड सेक्टर को फायदा होगा।
समझौता
भारत को निर्यात दोगुना करेगा EU
EU प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि समझौते के बाद EU भारत को अपना निर्यात दोगुना कर देगा। प्रतिनिधिमंड ने बताया कि टैरिफ कम होने से यूरोप के एग्री-फूड सेक्टर को फायदा होगा। साथ ही शराब, स्पिरिट्स, बीयर, जैतून का तेल, मार्जरीन, अन्य वनस्पति तेल, कीवी-नाशपाती, फलों का जूस, नॉन-अल्कोहलिक बीयर, प्रोसेस्ड फूड, भेड़ का मांस, सॉसेज और मांस से बनी अन्य चीजों की दरें कम होंगी। यह ऐतिहासिक समझौता EU का हर साल 4.36 लाख करोड़ रुपये बचाएगा।
समझौता
क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि EU के 27 देशों के साथ यह केवल व्यापार समझौता नहीं, बल्कि साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट है। उन्होंने कहा कि समझौता छोटे किसानों और उद्योगों की बाजार तक पहुंच बढ़ाएगा और विनिर्माण को बढ़ावा देगा। साथ ही EU-भारत के बीच निवेश को भी बढ़ाएगा। मोदी ने कहा कि समझौते से गतिशीलता के लिए नया ढांचा बनेगा, जिससे छात्र, श्रमिक और प्रोफेशनल लोगों के लिए EU में नए अवसर खुलेंगे।
संदेश
रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर फोकस
मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग किसी भी रणनीतिक समझौते की नींव होती है और इसे समझौते के जरिए औपचारिक रूप दे रहे हैं, जिससे काउंटर टेरिरज्म, समुद्री और साइबर सुरक्षा में साझेदारी और मजूबत होगी। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग का दायरा बढ़ेगा और रक्षा कंपनी सह-निर्माण के अवसर साकार करेगी। साथ ही भारत हिंद-प्रशांत से लेकर कैरेबियन तक त्रिपक्षीय परियोजना को विस्तार देगा, जिससे कृषि, ऊर्जा, महिला सशक्तिकरण को समर्थन मिलेगा।
ट्विटर पोस्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण
Addressing the joint press meet with European Council President António Costa and European Commission President Ursula von der Leyen.@eucopresident @vonderleyen @EUCouncil @EU_Commission https://t.co/0hh4YX8DHe
— Narendra Modi (@narendramodi) January 27, 2026
बयान
व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा- उर्सुला
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला ने कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों की पूरक शक्तियों को एक साथ लाता है और यह भारतीय कौशल, सेवाओं और व्यापक क्षमता को यूरोपीय प्रौद्योगिकी, पूंजी और नवाचार के साथ जोड़ता है। उन्होंने कहा कि अपनी शक्तियों को मिलाकर, हम रणनीतिक निर्भरता को कम करते हैं, ऐसे समय में जब व्यापार को तेजी से हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उर्सुला ने कहा कि यह समझौता वाणिज्य से परे है।
समझौता
भारत-EU समझौता एक बड़ा लक्ष्य
यह समझौता अगले पांच सालों के लिए भारत-EU रणनीतिक पार्टनरशिप का एक बड़ा ढांचा देता है, जिससे मजबूत व्यापार, निवेश संबंध, लचीली आपूर्ति चेन, तेज हरित बदलाव, बेहतर फिजिकल और डिजिटल कनेक्टिविटी, AI और नई टेक्नोलॉजी में गहरा सहयोग मिलेगा। साथ ही, सुरक्षा और रक्षा सहयोग में वृद्धि, आसान आना-जाना, ज्यादा नौकरी, बेहतर अवसर, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सहयोग, मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा, उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी, रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया को बढ़ावा और रक्षा विनिर्माण में नौकरियां बढ़ेगीं।
संदेश
"सभी समझौते की जननी"
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेस से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा कि भारत-EU व्यापार समझौते को "सभी समझौतों की जननी" है। उर्सुला ने एक्स पर लिखा, 'आज यूरोप और भारत इतिहास रच रहे हैं। हमने अब तक की सबसे बड़ी डील पक्की कर ली है। हमने दो अरब लोगों का एक मुक्त व्यापार जोन बनाया है, जिससे दोनों पक्षों को फायदा होगा। यह तो बस शुरुआत है।' कोस्टा ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता बताया।
समझौता
2007 से चली बातचीत अब हुई पूरी
इस समझौते को लेकर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन टैरिफ बाजार पहुंच और नियामक मानकों पर असहमति के कारण बातचीत 2013 में रुक गई। वैश्विक व्यापार तनाव बढ़ने के बाद 2022 में बातचीत फिर शुरू हुई और पिछले साल इसमें तेजी आई। भारत और EU का वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग एक चौथाई हिस्सा है और इनका संयुक्त बाजार लगभग दो अरब उपभोक्ताओं का है। समझौता दोनों देशों की बीच संबंध व्यापाक बनाएगा।